जलापूर्ति विभाग का मुद्दा गुंजा

  • उपअभियंता पर कानूनी कार्रवाई की मांग
  • स्थायी समिति में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास

वर्धा. गुरुवार को जिप अध्यक्षा सरिता गाखरे की अध्यक्षता में संपन्न हुई स्थायी समिति की सभा ग्रामीण जलापूर्ति, सिंचाई व पशुसंवर्धन विभाग के मुद्दों पर गुंजी. सभा में सदस्यों द्वारा रखे गए विविध महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किये गए. उक्त सभा शाम 6 बजे तक चली.

सभा में लम्पी स्कीन डिसीज पर नियंत्रण पाने की दृष्टी से टिका व दवाई के लिए जिप के सेस फंड से दस लाख रुपए मंजूर किये गए. परंतु उक्त खरिदारी आवश्यकता के अनुसान न करते हुए एकसाथ खरिदी गई. कृषि सभापति के नाते इस संबंध में मुझे विश्वास में नहीं लिया गया, ऐसा आरोप सभा में हुआ. इसपर अध्यक्ष ने अधिकारियों को उचित निर्देश दिए.

दूसरी ओर वनविभाग की समस्या से पांच नल योजना अधूरी होते हुए एक ही नल योजना अधूरी होने की गलत जानकारी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता ने दी़ यह गंभीर मुद्दा होते हुए भी उन्होंने लापरवाही बरती, ऐसा आरोप सदस्यों ने किया. इसके अलावा जलापूर्ति योजना के लिए आपूर्ति होनेवाली फैरिक अॅलम संदर्भ में विस्तृत चर्चा कर मंजूरी दी गई.

जहां बसस्थानक है व साप्ताहिक बाजार भरते है, ऐसे ठिकाणो पर सार्वजनिक शौचालय व पेशाबघर प्राथमिक रुप से निर्माण करें, ऐसी मांग गुटनेटा नितीन मडावी ने की़ इसके अलावा सिंचाई विभाग के उपअभियंता भालेराव ने प्रकरण की पुर्ण जांच न करते हुए कानून का उल्लंघन कर अपने अधिकार का दुरुपयोग किया. गाठे के खिलाफ सिंचाई कुआ अतिक्रमन जगह पर निर्माण करने को लेकर एफआईआर किया था.

इस संबंध में भालेराव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने संबंध में प्रस्ताव लिया गया़ वर्धिनी विक्री केंद्र की नई इमारत निर्माण की निविदा ठेकेदार ने 24 फिसदी बिलो भरने से इमारत का काम गुणवत्तापूर्वक नहीं हो पाया़ कार्य का दर्जा अच्छा होना चाहिए इस लिए उक्त निविदा रद्द कर नई निविदा मंगाई जाए, ऐसी मांग की गई़ इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थायी समिति की सभा गुंजी़ सभा में उपाध्यक्ष वैशाली येरावार, सभापति माधव चंदनखेडे, विजय आगलावे, मृणाल माटे, सरस्वती मडावी, मुकाअ डा़ सचिन ओम्बासे, अतिरिक्त मुकाअ सत्यजित बढे, उपमुकाअ विपुल जाधव, गुटनेते नितीन मडावी, संजय शिंदे सहित अन्य जिप सदस्य उपस्थित थे. 

अति. मुकाअ के पत्र पर आपत्ति

अतिरिक्त मुकाअ द्वारा निर्माण कार्य की अवधि बढाने संदर्भ में पत्र जारी किया था. इसपर आपत्ती जताते हुए अधिकांश कार्य लॉकडाऊन के कारण अथवा गिट्टी, रेत व मजदूरो के अभाव से नहीं हो पाये़ ऐसे कामों की अवधि बढाई जाए, इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग हुई.