Lohri

वर्धा/गिरड(का/सं). मकर संक्राति के एक दिन पूर्व जिले में पंजाबी परिवारों ने लोहड़ी पर्व उत्साह के साथ मनाया. सार्वजनिक तौर पर यह पर्व न मनाते हुए घर-घर में मनाया गया. कोरोना का साया इस वर्ष इस पर्व बना रहा. लोहड़ी का महत्व पहले बेटे के जन्म या बेटे की शादी वाले परिवार में ज्यादा रहता था. किंतु आज इसमें काफी बदलाव हो गया है.

लोहड़ी के कुछ दिन पूर्व पूरे गांव में गुड़ बांटकर लोहड़ी का न्योता दिया जाता था. लोहड़ी की रात सभी उनके घर एकत्रित होकर लकड़ियों, उपले आदि से अग्नि जलाते थे. सभी को गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, आदि बांटे जाते हैं. आग जलाकर नई फसल आने की खुशी में लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है.

किंतु जिले में कुछ ही पंजाबी व्यक्तियों के पास खेती होने के कारण इसका महत्व दिनों दिन कम होता जा रहा है. त्योहार के दौरान खीर, मक्के की रोटी और सरसों के साग का बड़ा महत्व है. गिरड में भी पर्व घर-घर में लोहड़ी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.