महात्मा के विचार, कर्मभूमि में ‘हे राम’

– गजानन गावंडे

वर्धा. समूचे विश्व को महात्मा गांधी के विचार प्रेरणादायी रहे है. किंतु उनके अनुयायी गांधी विचारों को उनकी ही कर्मभूमि में हे राम कहकर श्रद्धांजलि दे रहे है. सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के उपरांत अब सर्वसेवा संघ को लेकर गांधीवादियों में संघर्ष निर्माण हुआ है. एक और महात्मा के विचारों का जपनाम करना व दुसरी और उनके ही विचारों को ठोकर मारने का काम किया जा है. इससे महात्मा की आत्मा भी आज खुन के आंसू बहा रही होगी.

गत कुछ वर्षों में बापू के अनुयायी भटकने लगे है. इससे गांधी विचारधारा से जुडे अनेक संगठनों में दरार पडने लगी है. बिते 6 माह में गांधीवादियों का आपसी संघर्ष चरम पर पहुंच गया है. पहले सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान को लेकर प्रतिष्ठान के अध्यक्ष टी.आर.एन. प्रभू व सर्वसेवा संघ के अध्यक्ष महादेव विद्रोही में पद को लेकर खिंचतान हुई थी. यह संघर्ष गांधीवादियों के मुंह पर तमाचा जडने से कम नही था. दोनों अध्यक्षों ने तब एक दुसरे की खिंचाई कर बापू के विचारों की धज्जीयां उडाई थी. यह विवाद उपर से शांत हुआ था. किंतु भितर से सुलग ही रहा है. इसी बिच गांधीवादियों के महत्वपुर्ण संगठन सर्व सेवा संघ में विवाद की चिंगारी पडी. सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष महादेव विद्रोही को आननफानन में अध्यक्ष पद से हटाया गया. तत्पश्चात विवाद पुलिस थाने में जाने के साथ दोनों गुटों ने एक दुसरे पर भडास निकालनी शुरू कर दी है. बापू ने अपने पुरे जिवनकाल में विवादों को दूर रखकर भाईचारा निर्माण किया. परंतु आज उनके ही शिष्य बापू का यह आदर्श पाठ पुर्णरूप से भुल गये है. विद्रोही ने विवाद की जड आर्थिकता को बताया. तो दुसरे गुट ने विद्रोही के विद्रोह के कारण यह सब होने की बात कही. किंतु इसके पिछे का रहस्य बरकरार है.

सेवाग्राम आश्रम और विवाद यह नाता गत कुछ वर्षों में  काफी बढा है. आश्रम परिसर में अनुयायी के बिच मारपीट तक बात पंहुची है. ऐसा ही मारपीट का मामला सेवाग्राम थाने में  कुछ वर्ष पुर्व पहुंचा था. गांधीवावादियों में बढती हिंसा व क्रोध आज सभी के लिये चिंता का विषय है. क्रोध व हिंसा के खिलाफ लढने का मंत्र महात्मा ने दिया.किंतु आज उनके अनुयायी बापू का आदर्श पाठ भुल चुके गये. आश्रम के पदाधिकारियों की गोडसे विचारधारा भी इसके लिये महत्वपुर्ण रही है. कुछ वर्ष पुर्व राज्य के भाजपा सरकार के कार्यकाल में अनेक पदाधिकारी गोडसे विचारधारा से जुडे थे. तब भी यह संघर्ष उभरकर आया था. आश्रम प्रतिष्ठान व सर्व सेवा संघ के विवाद के कई अनुयायी जिम्मेदार रहे है. गांधी का नाम जपकर कुछ व्यक्तीयों ने राजनितिक अखाडे में अपनी रोटियां तक सेकने काम शुरू किया है. गांधी संगठनों की करोडो रूपयों की संपत्ती विवाद की मुख्य जड होने की बात कई बार सामने आयी है. वर्धा शहर, सेवाग्राम के साथ ही देशभर सर्वसेवा संघ व सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान की करोडों रूपयों की संपत्ती है.

शहर व सेवाग्राम में स्थित संपत्ती पर अनेकों ने अपना हक जताना शुरू किया है. वर्धा की करोडों रूपयों की जमीन कवडियों दाम भाडे पर दी गई है. गांधी विचारधारा के साथ अपनी स्वार्थसिद्धी साधनेवाले खाकीधारी आज इस संपत्ती से बडी आय कमा रहे है. तो कुछ पदाधिकारियों ने यहां की जगह राजनितिक दावपेचों के इस्तेमाल करने का काम शुरू किया है. विद्वता ही हमारी पुंजी कहनेवाले कुछ ढोंगी भी गत कुछ वर्षों में गांधी विचारधारा से जुडे है. नतिजन गांधीवादी संगठनों में संघर्ष का पर्व शुरू हुआ. बढता संघर्ष गांधीवादियों के लिये चिंता का विषय बन चुका है. गांधी विचारधारा से अनुयायी भटकने से गांधीविचारों को प्रतिदिन उन्हीं की कर्मभूमि में श्रद्धाजंलि देने का काम किया जा रहा है, यह सभी के लिये चिंता की बात है.