Wardha Bus Stand

    वर्धा. पुरानी हो चुकी बसों का रूपांतरण माल की ढुलाई के लिए करने का निर्णय एसटी महामंडल ने लिया है़ इस दौरान निजी बसें किराए पर चलाने के लिए ली जाएंगी, जिसके तहत निजी बसों को मेंटेनन्स के लिए जगह उपलब्ध कराने का आदेश राज्य के कुछ डिपो को प्राप्त हुआ है़ हालांकि अब तक वर्धा जिले के किसी भी डिपो में यह आदेश अब तक प्राप्त नहीं हुआ है़ वहीं आगामी कुछ दिनों में ये आदेश मिलने की संभावना को लेकर एसटी कर्मियों में हड़कम्प मच गया है़ जिले में एसटी महामंडल 4 विभागों में विभाजित है़ इसमें वर्धा, हिंगनघाट, पुलगांव एवं आर्वी-तलेगांव डिपो के अंतर्गत कार्यरत हजारों चालक, वाहक समेत विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारी नियुक्त है़ पहले ही लाकडाउन के कारण बसों का परिचालन बंद होने से एसटी आर्थिक घाटे में है़ इसके चलते कर्मचारियों को नियमित वेतन मिलेगा या नहीं, इसे लेकर संदेह बना रहता है़ अगर निजी बसें किराए पर चलाई गई तो एसट की आय घटेगी और समस्या में इजाफा होने की बात कर्मियों ने कही है.

    कर्मचारी संगठनों ने किया विरोध

    एसटी महामंडल परिचालन के लिए किराए पर निजी बसें लेने वाली है, जिसकी नियमित देखरेख व मेंटेनन्स के लिए डिपो में जगह का नक्क्षा बनाकर 48 घंटे में प्रस्तुत करने का आदेश राज्य के कुछ डिपो में मध्यवर्ती कार्यालय से प्राप्त हुआ है़ इसमें निजी वाहनों के लिए पार्किंग व मेंटेनन्स के लिए महामंडल की मालकियत की जगह उपलब्ध करराने, उसी प्रकार ज्यादा उत्पन्न जिस रूट पर है, वे निजी बसों के लिए उपलब्ध कराने का आदेश में उल्लेख है़ इससे एसटी और घाटे में जाने की बात संगठन ने कहते हुए उसका विरोध किया है.

    यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रश्न

    इसके पहले राज्य में किराए पर निजी शिवशाही बसें परिचालन के लिए ली गई थी, जिसमें प्रशिक्षित ड्राइवर नहीं होने से दुर्घटनाएं बढ़ने का आरोप लगाया जाता रहा है़ अब और निजी बसों की संख्या बढ़ने से तथा जिस पर कार्यरत अप्रशिक्षित चालकों की वजह से दुर्घटनाओं में वृद्धि होकर यात्रियों की सुरक्षा पर प्रश्न उपस्थित होगे.

    आदेश के बारे में जानकारी नहीं

    अब तक निजी बसों के परिचालन के लिए किसी भी डिपो में जगह उपलब्ध कराने को लेकर आदेश प्राप्त नहीं हुआ है़ इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं मिली है.

    -चेतन हसबनीस, विभागीय नियंत्रक-वर्धा.

    निजीकरण को हमारा है विरोध

    पहले ही एसटी महामंडल घाटे में है़ ऐसे में निजी बसों का परिचालन क्यों किया जा रहा है, यह बात समझ से परे है़ इस वजह से वर्षों से कार्यरत एसटी कर्मचारियों की नौकरी को खतरा निर्माण होने की संभावना है़ निजीकरण को हमारा विरोध है़ इस बारे में पत्र परिवहन मंत्री को भेजा गया है.

    -कुणाल वरवटकर, विभागीय सचिव-महाराष्ट्र एसटी कामगार संगठन वर्धा विभाग.