tree plant

  • पौधारोपण मुहिम सिमटी कागजात पर

– गजानन गावंडे

वर्धा. रेलवे विभाग द्वारा गत वर्ष पौधारोपण मुहिम चलाई गई. किंतु यह मुहिम केवल कागजातों तक ही सिमट कर रह गई है. देखभाल के अभाव में लगाये गये हजारों पौधो में से केवल चंद पौधे आज जिंदा बचे है. जिससे रेलवे की यह मुहिम केवल दिखावा साबित हुई है. परिणामस्वरूप रेलवे का लाखों रूपयों का खर्च भी व्यर्थ गया.

बढता प्रदुषण, वायुमंडल का बिगडे हुए संतुलन को देखते हुये रेलवे विभाग ने ट्रैक से सटी खाली जगह में पौधारोपण करने का निर्णय लिया था. नागपुर-मुंबई व नागपुर- चैन्नई रेलवे मार्ग से सटी जमीन खाली होने के कारण रेल विभाग ने इस खाली जगह पर पौधारोपण का निर्णय लिया था. जिसके लिये रेलवे द्वारा खास प्लान तैयार किया गया. जुलाई 2019 में गढ्ढे खोदने का ठेका दिया गया. साथ ही पौधे खरीदकर लाये गये. जुलाई व अगस्त माह में कुछ पौधे लगाये गये तो कुछ पौधे सितंबर माह में लगाये गये.

लेकिन शेष पौधों की ओर अनदेखी की गई. अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नही देने के कारण अधिकांश पौधे गढ्ढों में लगाने की बजाय खेतों के मेढ पर रखे गये. जिसके बाद किसी ने इसकी सुध नही ली. परिणामवश लगाये गये पौधे व पॉलीथीन में रखे हुये पौधे देखभाल के अभाव में सुखने लगे. वसुंधरा की रक्षा व प्रदुषण रोकने के लिए शुरु किया गया यह अभियान, नियोजन व अनदेखी के चलते असफल हो गया. जिससे रेलवे के लाखों रुपए पर पानी फिर गया. 

नियोजन का अभाव

वर्धा-पुलगाव मार्ग पर जिस जगह पौधारोपण किया गया, उसी जगह कुछ माह में केबल डालने के लिये जेसीबी से नाली की खुदाई की गई. जिस कारण लगाये गये पौधे मिट्टी के निचे दबे तो कुछ पौधे उखाडकर फेंके गये. जिससे पौधारोपण के दौरान पौधे कहां लगाये गये यह भी अनुसंधान का विषय है.

देखभाल का अभाव

पौधारोपण करने के उपरांत करीब एक से दो वर्ष तक पौधो का ख्याल रखना आवश्यक होता है. ग्रीष्मकाल में पानी के अभाव पौधे न मुरझे इसके लिये खास इंतजाम करने पडते है. तेज धुप में पौधे जीवित रहे, इसके लिए समय-समय पर पानी देना पडता है. परंतु रेल विभाग ने इसी और अनदेखी की. परिणामवश देखभाल के अभाव में अधिकतर पौधे सूख गए. अब बचे कुछ चंद पौधे ही रेलवे के उपक्रम की याद दिला रहे है.

किसानों ने दिया पौधों को जिवनदान

रेल विभाग ने लाये हुये पौधे खेत की मेढ पर छांव में रख दिये. परंतु यह पौधे लगाये नही जाने के कारण वही पडे रहे. यह बात किसानों के ध्यान में आने के उपरांत उन्होंने पौधों का ख्याल रखने से एक वर्ष के बाद भी इसमें से कुछ पौधे आज भी पॉलिथीन में जिंदा है.