cotton purchage center
File Photo

  • जिनिंग संचालक, व्यापारियों ने रखी मांग

वर्धा. कपास खरीदी करने वाले व्यापारियों के लिए रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म(आरसीएम) टैक्स परेशानी का सबब बन गई है़ यह टैक्स व्यापारियों पर आर्थिक बोझ साबित होने से उसे हटाने की मांग जिनिंग संचालक और कपास व्यापारियों ने सरकार से की है़ टैक्स हटाने से किसान व व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की आम राय जिनिंग संचालक, व्यापारियों ने व्यक्त की है.

टैक्स रद्द करना चाहिए

RCM टैक्स से किसानों को कपास का दाम कम मिलता है. सरकार इसके माध्यम से प्रत्येक कपास खरीदार से लगभग 60 लाख तक टैक्स के रूप में प्रति वर्ष जमा कराती है़  सरकार वह टैक्स व्यापारियों को वापस नहीं देती. ऐसा होने से व्यापारियों का कपास खरीदने का प्रति क्विंटल खर्च बढ़ जाता है. इस कारण कपास के दामों पर फरक पड़ता है. अतः टैक्स की राशि सरकार ने वापस देनी चाहिए व इसे रद्द करना चाहिए. 

-श्रीनिवास जाजोदिया, संचालक, सुदर्शन काटन इंडस्ट्रीज,जाम(चौरस्ता).

टैक्स से हो रही दिक्कतें

मैं सरकार से अपील करता हूं कि, किसानों से माल खरीदी पर सरकार ने जो आरसीएम टैक्स लगाया है वह बंद किया जाए़  इससे व्यापारी समुदाय को बहुत दिक्कतें सहनी पड़ती है. माल खरीदी की बजाए बिक्री पर टैक्स लिया जाए. परिणामस्वरूप हमें व्यापार करने में आसानी होगी़  बतौर एडवांस आरसीएम टैक्स से बहुत-बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ रही है़  किसान और व्यापारी के हित में सरकार ने आरसीएम टैक्स हटाना चाहिए.

-रोहित श्रीवास, संचालक, श्रीवास जिनिंग एंड प्रेसिंग,जाम(चौरस्ता).

किसानों पर पड़ रहा परिणाम 

सरकार की ओर से कपास खरीदी पर आरसीएम टैक्स लगाए जाने के कारण खरीदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है़, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है़  कपास खरीदार को जीएसटी की राशि भरनी पड़ती है़  आरसीएम टैक्स यह ज्यादा का बोझ है. अगर टैक्स लेते है तो उसकी रकम वापस मिलनी चाहिए.  

-संजय जाणे, व्यवस्थापक, एमवीडीएस जिनिंग व प्रेसिंग यूनिट, आष्टी.