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  • आठ वर्ष पहले हुआ निर्णय

वर्धा. आठ वर्ष लगातार न्यायालय के चक्कर काटने के बाद मेरे पक्ष में न्यायालय का निर्णय आया़ किन्तु आज 7 माह बितने पर भी उक्त निर्णय पर अमल नहीं किया गया़ अब आर्थिक व मानसिक रुप से मैं पुर्णत: थक चुका हूं. लघु सिंचाई विभाग मनमानी रवैया अपना रहा है़ ऐसी स्थिति में मेरे सामने आत्महत्या के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है़ इस लिए जिलाधिकारी साहब मुझे आप ही ईच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करें. इस आशय का भावनिक निवेदन सेवानिवृत्त कर्मी व वरिष्ठ नागरिक ने जिला प्रशासन को प्रदान किया है़ 

बता दे कि, सिंदी (मेघे) के एकतानगर निवासी वाल्मीक ना़ बहादुरे 31 मार्च 2012 को लघु सिंचाई विभाग, वर्धा से सेवानिवृत्त हूए़ वें बतौर टंकलेखक कार्यरत थे़ सेवानिवृत्ती के छह माह पूर्व उनकी सेवापुस्तिका वेतन जांच के लिए नागपुर भेजी गई थी़ इसमें वेतन निश्चिती पर गलत तरीके से आपत्ती जताई गई़ शासन निर्णय नुसार इसकी प्रतिपुर्ती सिंचाई विभाग ने करना जरुरी था़ किन्तु ऐसा न करते हुए सेवानिवृत्ती आय से 73 हजार 473 रुपए वसूले गए़ कार्यालयीन गलती के कारण उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पडा़.

आठ वर्षों तक चक्कर काटने के बाद उनके पक्ष में 18 नवम्बर 2019 को निर्णय आया़ उनसे वसुली गई राशी वापिस लौटाने के निर्देश दिये गए़ किन्तु आज सात माह बितने पर भी राशी प्रदान की गई़ कार्यकारी अभियंता से भेंट करने पर वें केवल टालमटोल रवैया अपना रहे है़ इतना ही नहीं तो वसूली का धनादेश दिया जाएंगा, इसपर ब्याज न मांगे ऐसा भी स्टैम्प पर पर लिखवाया गया़ आज कोरोना संक्रमण की इस स्थिति में परिवार बुरे दौर से गुजर रहा है़.

गुजर बसेरा नहीं हो पा रहा है़ मेरी पत्नी गंभीर बिमारी से ग्रस्त है़ पुत्री का विवाह हुआ था, किन्तु वह भी पति की प्रताडना से मयके वापिस लौटी है़  अब मैं संघर्ष करते करते थक चुका हुं.आप ही मुझे इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान करें, ऐसी मांग निवेदन में बहादुरे ने जिलाधिकारी को भेजे निवेदन में की है़.