सिकलसेल गंभीर बीमारी, करें नियमित जांच- डा. राठोड

  • स्वास्थ्य विभाग का सिकलसेल सप्ताह आरंभ

देवली. सिकलसेल लाल रक्त पेशी में होता है. सर्वसामान्य व्यक्ति के शरीर की लाल रक्तपेशी का आकार गोल होता है. परंतु सिकलसेल बीमारी में इस रक्तपेशी का आकार बदल जाता है. सिकलसेल यह गंभीर बीमारी है. जिससे इसकी नियमित जांच करने का आहवान वैद्यकीय अधीक्षक डा. दिनेश राठोड ने किया.

ग्रामीण अस्पताल भिडी व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गौल के संयुक्त तत्वावधान में वैद्यकीय अधीक्षक डा. दिनेश राठोड की अध्यक्षता में सिलकसेल सप्ताह की शुरुआत की गई. 17 दिसंबर तक मनाए जानेवाले इस सप्ताह अंतर्गत जनजागृति कर लोगों को मार्गदर्शन किया जाएगा. इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवक दिलीप उटाने, डा. नवीन श्यामसुंदर, डा. रुचा देशमुख, डा. अश्विनी जैयस्वाल, सविता फरताडे, रिता कोकुलकर, सुनील नागपुरे, प्रशांत काकडे, शोभा मेंढे उपस्थित थे. स्वास्थ्य सेवक दिलीप उटाणे ने कहा कि, यह बीमारी अनुवांशिक है. इस बीमारी में पेट में काफी दर्द होता है.

जिस व्यक्ति को सिकलसेल बीमारी में तकलीफ नही होती, वह व्यक्ति अगली पीढी को यह बीमारी दे सकता है. जिससे विशेष ध्यान रखने की जरुरत है. डा. अश्विनी जैयस्वाल ने सिकलसेल बीमारी के लक्षण की जानकारी दी. जिसमें हाथ, पैरों पर सुजन, आंखे पिली होना, थकान, हिमोग्लोबीन का प्रमाण कम होने पर तुरंत डाक्टरों की सलाह लेने का आहवान किया. इस अवसर पर प्रयोगस्कूल तंत्रज्ञ प्रशांत काकडे व सविता डवलकर ने सभी की सिकलसेल जांच की.

प्रास्ताविक स्वास्थ्य पर्यवेक्षक शोभा मेंढे ने रखा. संचालन नंदा नरखेडकर ने किया तथा आभार सामाजिक कार्यकर्ता संध्या मिश्रा ने माना. सफलतार्थ रामेश्वर तिवारी, भावना कांबले, वृंदा घोडमारे, प्रिती वाघमारे, सुषमा डडमल, प्रवीण कैथवास, मनीष पेठकर, रोहन कैलासकर, निवृत्ति कडू, आशीष अतकर, बंडू बाकरे, शीला मडावी, मंगेश खत्री, गोपाल कलुके उपस्थित थे.