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  • पटवारियों को मिले मौखिक आदेश, ग्रामसेवक जुटे काम में

सिंदी रेलवे. प्राकृतिक आपदा के चलते सोयाबीन फसल का भारी नुकसान हुआ है. कुछ किसानों के खेत में सोयाबीन को एक फल्ली तक नही लगी. जिससे सोयाबीन नुकसान का सर्वेक्षण कर मुआवजा देने की मांग की जा रही है. परंतु वास्तविक रुप में सोयाबीन का पंचनामा करने आनाकानी हो रही है. पटवारी व ग्रामसेवक को कुर्सी में बैठकर ही नुकसान की जानकारी उपलब्ध कराने सहूलियत देने की विश्वसनीय जानकारी सूत्रों से मिली है.

गत सप्ताह में वर्धा जिले के अनेक क्षेत्र में मूसलाधार बारिश हुई. परिणाम स्वरुप कटाई के लिए आए सोयाबीन पर किटकों का प्रादुर्भाव हुआ. विविध रोगों का आक्रमण होने से मुंह तक आया निवाला छिन गया. लगभग पूरी सोयाबीन की फसल ही चौपट हो गई. सिंदी रेलवे परिसर में 39 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन उत्पादक किसानों के खेत में एक फल्ली तक नही लगी. जिससे संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई. सेलू के कृषि अधिकारी उमेश येंडे ने किसना वरघने के खेत में भेंट दी.

उन्होने डेढ हेक्टेयर में एक भी फल्ली नही मिली. जिस पर उन्होने बीज सदोष है, परंतु मैं लिखित अभिप्राय नही देता. क्योकि सरकार सभी को पूर्ण मदद देंगी. आपकों सौं फीसदी नुकसान मुआवजा मिलेगा, ऐसा कहकर बात को टाल दिया. इस वर्ष अनेक साझा में पटवारी व ग्रापं में ग्रामसेवक नही है. एक पटवारी पर चार क्षेत्र का प्रभार है. जिससे खेत में जाकर सर्वेक्षण करने के बदले सामूहिक समन्वय कर बैठी जगह से नुकसान का प्रतिशत निकालना शुरु है.

जिसमें अन्याय होने पर भी किसान किस आधार पर उजागर करेंगे? यह मनसुबा राजस्व विभाग का होने की चर्चा है. अगर ऐसा हुआ तो किसानों पर अन्याय तय है. सोयाबीन का नुकसान होने से किसान संकट में है. ऐसे में किसानों को नुकसान का उचित मुआवजा मिलना आवश्यक है. परंतु अगर कुर्सी पर बैठकर ही सर्वे होना है तो, मुआवजे की उम्मीद ही नही की जा सकती.