दशहरे से शुरु करें शासकीय कपास खरीदी, किसान नेता विजय जावंधिया की मांग

  • मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

वर्धा. इस वर्ष कपास की बुआई जल्द हुई है. जिससे किसानों के घर कपास भी शीघ्र आयेगा. कुछ क्षेत्र में कपास निकालने के काम को शुरुआत हुई है. परंतु लॉकडाऊन तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में छायी मंदी के चलते कपास को अच्छा दाम नही मिल सकता. जिस कारण सरकार के गारंटी मूल्य 5825 रुपए के तहत दशहरे से शासकीय कपास खरीदी शुरु करने की मांग किसान नेता विजय जावंधिया ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को ज्ञापन सौंपकर की है.

इस वर्ष अधिकमास होने से विजयादशमी 25 अक्टूबर को है. गत वर्ष 8 अक्टूबर को थी. यानि करीब 17 दिन देरी से है. कोरोना महामारी की पार्श्वभूमि पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कपास बाजार में मंदी की लहर कायम है. गत मौसम में व्यापारी वर्ग ने दशहरे के शुभ मुर्हूरत पर 6000 रुपए प्रति क्विंटल से कपास खरीदी प्रारंभ की थी. परंतु इस वर्ष (20-21) में 4500 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक दर नही दे सकतें, यह स्पष्ट है. सरकार का गारंटी मूल्य 5825 रुपए प्रति क्विंटल है.

सरकार गारंटी मूल्य से कपास की खरीदी विजयादशमी से शुरु नही की तो किसानों को 4500 रुपए प्रति क्विंटल से भी कम दाम में कपास बेचना पडेगा. कपास निर्यात करने के बाद भी कपास को दाम नही मिल सकता. क्योकि अमेरिका के बाजार में कपास के दाम में मंदी है. आज का अमेरिका का कॉटन का दाम 70 से 71 सेंट प्रति पाऊंड (आधा किलो) रुई का है. इसका अर्थ एक किलो रुई को 144 रुपए रुपए होते है.

एक क्विंटल कपास से 34 किलो रुई मिलती है. उसका 3876 रुपए होते है व 65 किलो सरकी 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से 1300 रुपए कुल 5176 रुपए होते है. प्रक्रिया का खर्च, ब्याज, व्यापारी मुनाफा विचार करें तो 4500 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक दाम नही होता. इस स्थिति का विचार कर दशहरे से शासकीय कपास खरीदी शुरु करने की मांग किसान नेता विजय जावंधिया ने की है.