पढाई एमबीए, बेच रहा चाय

  • हालातों से लडकर उच्च शिक्षित युवक ने शुरु किया स्वयंरोजगार
  • चाय बेचकर कर रहा परिवार का उदरनिर्वाह

– प्रणीता राजूरकर

वर्धा. कोरोना के कारण निर्माण हुई परिस्थिति का सामना करना सभी के लिए आसान नही है. रोजगार छिनने से दो वक्त की रोटी के लिए भी अनेकों को तरसना पड रहा है. परंतु हजारों रुपयों की नोकरी चले जाने के बाद उसका गम न मनाते हुए चाय बेचकर रोजगार खोजनेवाले भारत डोंगरे (33) की कहानी कुछ ओर ही है. पुणे स्थित बडी कंपनी में प्रबंधक पद पर कार्यरत बीएएसी, एमबीए भारत डोंगरे ने वर्धा में चाय कैन्टींग शुरु कर रोजगार का मार्ग खोजा है. उसकी यह पहल युवकों के समक्ष प्रेरणादायी है.

बेरोजगारी सबसे गंभीर मुद्दा है. उच्च शिक्षित भी रोजगार की तलाश में भटक रहे है. कोरोना काल में यह स्थिति तो बद से बदत्तर हो गई है. जिससे अनेक युवा मानसिक बीमारी से ग्रस्त होकर नशे के आदी हो रहे है. परंतु भारत डोंगरे ने नौकरी जाने के बाद भी निराश न होते हुए अपनी सफलता का मार्ग खुद चुना है. भारत डोंगरे अकोला जिले के बालापुर तहसील अंतर्गत आनेवाले अंदुर गांव का निवासी है. घर में माता-पिता व छोटा भाई ऐसा परिवार है. पिता मजदूरी कर उदरनिर्वाह चलाते थे. घर के हालात ठिक नही रहने से भारत ने गांव से दस किमी दूरी पर स्थित कारंजा गांव के जिजामाता विद्यालय में बारहवीं तक शिक्षा पूर्ण की. पढाई में तेज होने के कारण अकोला के शिवाजी कॉलेज से बीएससी की पदवी भी उत्तीर्ण की. पश्चात पुणे स्थित कंपनी में उसे नोकरी लगी. पांच वर्ष कंपनी में काम करने के बाद दूसरी कंपनी में काम शुरु किया.

वर्ष 2017 में भारत का विवाह हुआ. विवाह के बाद पुणे विद्यापीठ से वर्ष 2018 में एमबीए की परीक्षा उत्तीर्ण की. जिसके बाद भारत को पुणे स्थित बडी कंपनी में क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर की नौकरी मिली. जिससे भारत की दुनिया ही बदल गई. उसका भाई भी पुणे में चाय की कंपनी में काम करता था. परंतु कोरोना काल में भारत को अपनी नोकरी गवानी पडी. जून माह में भारत अपने मूल गांव अकोला लौटा. भारत की पत्नी ठेकेदार पद्धति पर वर्धा में नोकरी पर है. परंतु उसका भी वेतन कम होने से परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया. जिस कारण भारत रोजगार की तलाश में पूरे परिवार के साथ वर्धा पहुंचा. नोकरी करने के बदले उद्योग शुरु करने का विचार भारत ने किया. छोटे भाई रवि के चाय कंपनी का अनुभव ध्यान में लेकर चाय कैन्टींग शुरु करने का निर्णय लिया. जिससे सोशालिस्ट चौक में चाय कैन्टींग शुरु की. जिसके लिए भाई रवि व पिता ने भी मदद शुरु की. जिसके जरीए भारत अब प्रतिदिन 700 रुपए की कमाई कर परिवार का उदरनिर्वाह कर रहा है. हालातों के सामने हाथ न टेकते हुए भारत ने उच्च शिक्षित होकर जो मार्ग चुना वह सभी के लिए प्रेरणादायी है.

कार्यालयों व दूकानों में घुमकर बेचता है चाय

चाय कैन्टींग शुरु करने के बाद कुछ दिनों तक काफी मुश्किल भरे रहे. लॉकडाऊन के चलते ग्राहक भी नही मिल रहे थे. फिर भारत ने शहर के निजी कार्यालय व दूकानों में घुमकर चाय बेचना शुरु किया. आज भी भारत शहर के निजी, शासकीय कार्यालयों में घुमकर चाय बेच रहा है. जिससे प्रतिदिन 700 रुपए की आय होने की जानकारी भारत ने दी.

निराश न हो युवा : बेराजगारी यह बडी समस्या है. कोरोना काल में अनेकों को नोकरी गवानी पडी है. परंतु युवकों ने निराश न होते हुए आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनना चाहिए. स्वयंरोजगार स्थापित करें.

भारत डोंगरे, चाय विक्रेता