ग्राहकी आधी, भाव डेढ गुणा, बाजार पर महंगाई की मार

पुलगांव. इन दिनों बाजार पर महंगाई की मार के कारण पूरी तरह से मंदी का दौर चल रहा है. नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण किराना सामग्री के दामों में तेजी आ गई है. परंतु पिछले साल की तुलना में इस साल ग्राहकी आधी व भाव डेढगुणा ऐसी स्थिति निर्माण हुई है.

बाजार में छायी मंदी का मुख्य कारण किसानों को होनेवाली सोयाबीन फसल का मार खाना है. सोयाबीन फसल बेचकर किसान अपने परिवार की दीपावली मनाता है. लेकिन इस बार की दीपावली किसानों की पूरी तरह से अंधेरे में रही. सब्जी के दाम भी आसंमान छुं रहे है. आलू, प्याज ने आम आदमी के आंखो से आंसू निकाल लिए. सोयाबीन तेल दीपावली के पखवाडे से पूर्व 1400 से 1425 तक था और दीपावली आते ही इसके दाम 250 रुपए से बढकर 1625-1650 तक बढ गए है.

सोयाबीन की फसल कम होने के कारण तेल के दाम में बढत हुई है. इसमें कई ढोक व्यापारियों ने माल भरकर अच्छी कमाई भी कर ली. अब आगे भी सोयाबीन तेल के भाव कम होने के कोई आसार नजर नही आ रहे है. सोयाबीन के साथ फल्ली, सूर्यमुखी यहा तक सरसों तेल के दाम भी आसमान छूं रहे है. सरसो तेल 120 से 160 रुपए किलो हो गया है. इधर तुअर, चना दालों में भी दिवाली में दाम उचे स्तर पर हो गए थे. लेकिन अब दाम स्थिर हो गए. मध्यम वर्गीय परिवार को उचे स्तर दामों के कारण बहोत परेशानी का सामना करना पड रहा है. आगे भी दामों में किसी प्रकार की कमी आने की संभावना दिखायी नही दे रही है.

ग्राहकी में कमी

इस वर्ष सोयाबीन की फसल में कमी आने के कारण तेल के भाव में करीब 230 रुपए की बढोत्तरी हुई है. दाम बढने से ग्राहकी कम है. रोजमर्रा की जरुरत होने से विक्री तो हो रही लेकिन ग्राहकी पर असर हुआ है. – पिंटू बत्रा, होलसेल किराणा व्यवसायी

डेढ गुणा वृद्धि

कई परिवारों को सरसों के तेल की जरुरत होती है. जिसके दामों में बहोत बढता हो गई है. साथ ही सोयाबीन तेल के दाम बढने से ग्राहकी प्रभावित हुई है. दामों में डेढ गुणा वृद्धि दर्ज की गई है. – नीरज तिवारी, किराणा व्यवसायी

फसल पर निर्भर होते है दाम

किसानों की फसल पर ही सभी के दाम निर्भर करते है. इस बार सोयाबीन फसल बर्बाद होने से उसका असर तेल के दाम पर हुआ. पखवाडे में तेल के दाम में काफी वृद्धि हुई. जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का आर्थिक बजट बिगाडा है. – अशोक ढींग, होलसेल किराणा व्यवसायी