Holi

  • कर्फ्यू के चलते सोशल मीडिया पर शुभेच्छा दी जा रही

हिंगणघाट. शहर में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण प्रशासन ने 27 मार्च की शाम 8 बजे से 30 मार्च की सुबह 8 बजे तक कर्फ्यू लागू कर दिया है. कर्फ्यू से देशभर में परंपरा रूप से मनाया जाने वाला रंगों का त्योहार बेरंग हो गया है. अब केवल सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देकर और कलर भेजकर ही होली और रंगपंचमी मनानी पड़ रही हैं. न कोई होली जलेगी और न किसी को रंगों से भिगोया जाएगा. जीवनाश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी व्यवसाय बंद रहने से न कोई खरीदी, न कोई उत्साह से त्योहार मना सकेगा.

जिलाधिकारी के आदेश से 60 घंटे का कर्फ्यू लगने से सड़के सुनसान हो गई. सभी व्यवसाय भी बंद रखे गए. हर साल होली के त्योहार की चहल पहल रहती थी, जो इस बार नदारद रही. रंग पिचकारी के साथ मिठाई और नमकीन की खरीदी के लिए जो भीड़ लगती थी, वो इस बार नहीं लगी. साल भर से ये व्यवसायी होली की राह तकते रहते थे. रंग पिचकारी बेचकर कुछ दिन के गुजर बसर का सपना देखने वालों को निराशा झेलनी पड़ी.

होली की गाठियां दुगने से भारी

होली पर भेंट स्वरूप दी जाने वाली गाठी को दुगने से भी ज्यादा से भाव से खरीदने की नौबत लोगों पर आई. शक्कर से बनाई गई गाठी का होली के पर्व पर विशेष महत्व रहता है. छोटे बच्चों को इसे पहनाया जाता है. ये गाठियां पिछले माह ८० रुपए किलो थी. जो होली नजदीक आते ही 180 से 200 रुपए  किलो बेची जा रही है. कोरोना संकट से इस साल गाठी का उत्पादन बड़ी मात्रा में नहीं किया गया. बाजार में इसकी कमी महसूस की गई. इसका फायदा उठाते हुए जिसके पास का स्टाक था, उन्होंने बढ़े रेट में बेचना शुरू कर दिया. होली पर्व पर इसका विशेष महत्व होने से लोगों को मजबूरन बढ़े भाव से गाठी खरीदना पड़ रहा है.

मटन चिकन विक्रेता की गुहार

होली के बाद पाड़वा पर चिकन मटन खाने वालों को इस बार मायूस होना पड़ेगा. ६० घंटे के कर्फ्यू की वजह से पाड़वा के दिन भी बाजार बंद रहेगा. जिस दिन बड़ी मात्रा में लोग मटन चिकन खरीदते उसी दिन बंद रहने से इन व्यवसायियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इन लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर कुछ समय के लिए दूकान शुरू रखने की गुहार लगाई है. इन व्यवसायियों ने ज्ञापन में सुबह ६ से दोपहर १ बजे तक मांस बिक्री की अनुमति देने की मांग की है.