Tilori Maina, Wardha

  • बहार के पक्षी अभ्यासक दिलीप वीरखेडे का पंजीयन

वर्धा. देश में मुख्य रुप से ठंड में स्थलांतर करनेवाले व महाराष्ट्र में दुर्लभ मानीजानी वाली तिलोरी मैना यानि युरोपियन स्टर्लिंग जिले में पायी गई है. बहार के पंछी अभ्यासक दिलीप वीरखेडे ने यह पंजीयन किया.

तिलोरी मैना का अंग्रेजी नाम युरोपियन स्टर्लिंग है, वही वैज्ञानिक नाम स्टरनस वल्गारीस है. तिलोरी मैना इस पंछी का मूल अधिवास पश्चिम व दक्षिण युरोप तथा नैऋत्य आशिया में होता है. भारत में यह पंछी ठंड में स्थलांतर करते है. यह स्थलांतर प्रमुख रुप से राजस्थान, गुजरात, पंजाब, दिल्ली, हरियाण व उत्तर प्रदेश में होता है. कश्मीर में यह पंछी ग्रीष्म में स्थलांतर करता है. दक्षिण भारत में इस पंछी काफी कम प्रमाण में दिखायी दिया है. तिलोरी मैना यह मैना कुल का पंछी है.

सामान्य तौर पर 20 सेंटी मीटर लंबा होता है. छोटी पूंछ, लंबी व नुकीली चोंच व मुख्य रुप से काले रंग का यह पंछी होता है. शरीर पर सफेद रंग के दाग दिखायी देते है.

दलदल क्षेत्र, खेत परिसर, मनुष्य बस्ती समीप यह इनका अधिवास है. आर्वी तहसील के एक बांध समीप कवडी मैना (एशियन पाईड स्टार्लिंग) एक छोटे झूंड में पंछी पाया जाता है. बहार नेचर फाऊंडेशन ने पंछी सप्ताह में वर्धा जिले की पंछीसूची पुर्नप्रकाशित की. जिसमें तिलोरी मैना का भी समावेश हुआ. राज्य के इस पंजीयन के लिए दिलीप वीरखडे को सभी ओर से बधाई दी जा रही है.