26 thousand crore loss to cotton producers

  • किसान नेता विजय जावंधिया की जानकारी पीएम को भेजा पत्र

वर्धा. सफेद सोना पैदा करनेवाले कपास उत्पादक किसानों को इस वर्ष बडा नुकसान सहना पडा. करीब 26 हजार करोड रुपए किसानों को कम मिलने की जानकारी किसान नेता विजय जावंधिया ने दी है. इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर नुकसान पर रोशिनी डाली है.

विजय जावंधिया ने पत्र में नरेंद्र मोदी को कहा कि, कोयला खदानों की नीलामी के समय आपका भाषण हमेशा की तरह ही प्रोत्साहित करनेवाला था. इस भाषण में कृषि ओर किसान की आमदनी का जिक्र किया गया है. खरीफ का क्षेत्र 13 फीसदी बढा है.गेंहू की सरकारी खरीदी में 11 फीसदी वृद्धि हुई है. किसानों की जेब में भी इस बार ज्यादा पैसा पहुंचा है. आपने कहा तो देश ओर  दुनिया इसे सच मानेगी. परंतु सफेद सोना पैदा

करनेवाले किसानों की व्यथा कुछ ओर ही है. इस संबंध में 13 अगस्त 2019 को भी पत्र भेज गया था. अमेरिका के बाजार में 30 फीसदी की मंदी है. तो कपास उत्पादक किसानों की आमदनी दुगनी कैसे ? पीएम कार्यालय से कृषि लागत व मूल्य आयोग के अध्यक्ष के पास पत्र भेजा गया. परंतु जवाब नही आया. उसके बाद तो कोरोना महामारी ने ही देश ओर दुनिया के सभी क्षेत्रों में मंदी का माहौल बढा दिया है. भारत से कपास-सुत की निर्यात घट चुकी है. अमेरिका के न्यूयार्क कपास बाजार में पहले  80-84 सेंट प्रति पाऊंड रुई के दाम आज 60-65 सेंट प्रति पाऊंड तक गिर गये है. भारत के बाजार में भी रुई

के गांठो के दाम 42000-45000 रुपए प्रति थे, जो 34000-36000 रुपए प्रति खण्डी तक गिर गए है. 25 मार्च के लॉकडाउन के पहिले व्यापारी किसानों से 5100 से 5200 रुपए प्रति क्विंटल कपास खरीदी करते थे. आज 4500 रुपए प्रति क्विंटल दाम भी नही दे रहे है. कपास उत्पादक किसानों ने 2018-19 के मौसम में 6200 से 6500 प्रति क्विंटल के दाम से कपास बेची थी. आज 1500 रुपए प्रति क्विंटल कम दाम से बेचने पर मजबुर होना पड रहा है. वर्ष 19-20 में 350 लाख गांठे रुई की पैदा होने का अनुमानित है. एक रुई की

गांठ के लिए पांच क्विंटल कपास लगता है. मतलब एक गांठ पर ही किसान के जेब में 7500 रुपए कम पहुंचे है. याने साढे तीन करोड गांठो पर यह राशि 26 हजार करोड के पास होती है. दूसरी ओर किसान का खेती खर्च भी बढा है. फिर आमदनी कैसे बढेगी ऐसा प्रश्न जावंधिया ने पत्र में उपस्थित किया है.