Road in Vasuli village of Chakan is in ruins, people are getting worried

    • मार्ग बदलने को मजबूर लोग 

    रिसोड. शहर का सबसे महत्वपूर्ण सिविल लाइन मार्ग और मालेगांव नाका से वाशिम नाका मार्ग पर चलना लोगों की मजबूरी बन गया है. ज्यादातर लोग अपने काम व यातायात के लिए भी अन्य मार्ग का उपयोग करना पसंद कर रहे है. जो लोग इस मार्ग से चल रहे है वो उनकी मजबूरी है. शहर का सिविल लाइन मार्ग कालुशा बाबा दर्गाह से वाशिम नाका तक इतना दर्दनाक हो गया है कि सड़कों में गड्ढें है या गड्ढों में सड़क यह समझ से परे है.

    इस सड़कों का निर्माण तकनीकी अड़चनों और ई टेंडर के जाल में अटक गया है. लगातार आंदोलनों का असर भी नही हो रहा है. शहर और तहसील के लिहाज से यह दोनों सड़के सबसे महत्वपूर्ण और आर्थिक दृष्टि से बहुत ज्यादा माइने रखती है. राष्ट्रीयकृत बैंक सिविल लाइन रास्ते पर है.

    इस से आम लोगों के अलावा किसानों और व्यापारियों का तांता इस रास्ते पर लगा रहता है. इसके अलावा विद्यालय, महाविद्यालय इसी रास्ते पर होने से छात्र छात्राओं का आना जाना बड़े पैमाने पर होता रहता है. कपड़ा, किराना, जनरल व्यापार के अलावा तहसील कार्यालय, पंचायत समिति पोस्ट आफिस, कृषि उपज मंडी, न्यायालय इसी मार्ग पर है.

    अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सड़क कितनी महत्वपूर्ण है. लेकिन यहीं सड़क सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखी के कारण अपनी पहचान खो रही है. रास्ता पूरी तरह से छलनी हो चुका है. रास्ते में पड़े गड्ढे मानो छोटे छोटे तालाब बनाए गए हो. राहगीरों का चलना दुभर हो गया है. बीच में गड्ढों को पाटने की औपचारिकता कई बार देखी जा चुकी है. लेकिन रास्ते की हालत खराब हो चुकी है.

    इसके अलावा राज्य महामार्ग का दर्जा प्राप्त मालेगांव, रिसोड, हिंगोली इस मार्ग का निर्माण रिसोड शहर से 5 किमी दूर ग्राम बिबखेडा तक लगभग पूरा हो चुका है. लेकिन बिबखेडा से हिंगोली जिले की सीमा तक का यह काम बंद पड़ा हुआ है. इस रास्ते का निर्माण कार्य ठेकेदार और मजदूर भी नदारद है.

    अकोला, औरंगाबाद, बुलढाना, परभणी, हिंगोली जैसे जिलों को जोड़नेवाले इस रास्तों पर भारी भरकम वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन इस रास्तों पर पड़े गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रहे है. कुंभकर्णी नींद में सोए संबंधित विभाग की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. अपने काम से निकले अधिकांश लोग गली कुचे या फिर अन्य रास्ते का उपयोग करते दिखाई देते है. लोगों को संबंधित विभाग के कुंभकर्णी नींद से जागने का इंतजार है.