जिले में 61 पैसेवारी घोषित

वाशिम. वर्ष 2018-19 में खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों की अंतिम पैसेवारी जिला प्रशासन ने 31 दिसबंर को घोषित की. इसके अनुसार जिले के केवल 52 गांवों में 50 प्रश से कम पैसेवारी हुई. जबकि शेष 741 गांवों में

वाशिम. वर्ष 2018-19 में खरीफ मौसम की प्रमुख फसलों की अंतिम पैसेवारी जिला प्रशासन ने 31 दिसबंर को घोषित की. इसके अनुसार जिले के केवल 52 गांवों में 50 प्रश से कम पैसेवारी हुई. जबकि शेष 741 गांवों में 50 पैसे से अधिक पैसेवारी है. जिले का अंतिम पैसेवारी औसत 62 बताया गया है. वर्ष 2018 में बारिश की नियमितता नहीं रहने से खरीफ मौसम में फसलों के उत्पादनों मे भारी कमी में आयी थी. उल्लेखनीय है कि जिले में भले ही गारंटी मूल्य के अनुसार कृषि माल की खरीदी की गई लेकिन किसानों को कई प्राकृतिक आपदाओं व मानवी संकटों का सामना करना पड़ा. उत्पादन में भारी कमी आने से खरीफ मौसम की अंतिम पैसेवारी का औसत 50 पैसे से कम आयेगा, ऐसी अपेक्षा किसानों को थी लेकिन अंतिम पैसेवारी घोषित होने के बाद उन्हें निराशा ही हुई.

52 गांवों में 50 प्रश से कम
जिले में कुल 793 राजस्व गांव हैं. इन सभी गांवों में खरीफ मौसम की अंतिम पैसेवारी तहसीलदार के प्रस्ताव के अनुसार घोषित की गई. इनमें केवल रिसोड तहसील के 28 व मानोरा तहसील के 24 गांवों सहित कुल 52 गांवों में 50 से कम पैसेवारी घोषित की गई है़ इस कारण इन तहसीलों के गांवों को सूखाग्रस्त सुविधाएं मिलने की आशा किसानों द्वारा व्यक्त की जा रही है. लेकिन दूसरी ओर शेष 741 गांवों में 50 से अधिक पैसेवारी घोषित की गई है. इस कारण जिले के खरीफ मौसम की अंतिम पैसेवारी का औसत 62 रहने से जिले में सूखाग्रस्त क्षेत्रों जैसी सहूलियतें नहीं मिलने की आशंका किसानों को है.

4 तहसीलों में 50 से अधिक
सूखे की सहुलियत लागू करने के लिए खरीफ मौसम की अंतिम पैसेवारी, यह दुय्यम निकष होने की जानकारी निवासी उप जिलाधिकीरी शैलेश हिंगे ने दी है. इनमें वाशिम तहसील में कुल 131 गांव, मालेगांव के कुल 122 गांव, मंगरुलपीर में 137 गांव, कारंजा में 167 गांव हैं. इन सभी गांवों में 50 से अधिक पैसेवारी घोषित की गई है. इस कारण इन तहसीलों के गांवों को सूखाग्रस्त क्षेत्रों जैसी सहूलियतें मिलेंगी इसकी संभावना कम ही लग ही है. जबकि रिसोड तहसील में कुल 100 गांवों में पैसेवारी 28 और मानोरा में कुल 136 गांवों की पैसेवारी 24 है. जिससे जिले में कुल 52 गांवों में ही 50 से कम पैसेवारी घोषित की गई है.