शाहू महाराज इनके विचार समाज मे जडना आवश्यक

वाशिम. समाज के अंतिम घटकों तक शिक्षा पहुंचाकर उनके विकास के लिए प्रयास करने वाले व सन्मान के अवसर देकर सामाजिक समता के लिए प्रयास करने वाले राजर्षि शाहू महाराज के विचारों को आत्मसात करना जरूरी है.ऐसा

वाशिम. समाज के अंतिम घटकों तक शिक्षा पहुंचाकर उनके विकास के लिए प्रयास करने वाले व सन्मान के अवसर देकर सामाजिक समता के लिए प्रयास करने वाले राजर्षि शाहू महाराज के विचारों को आत्मसात करना जरूरी है.ऐसा प्रतिपादन जिला परिषद अध्यक्षा हर्षदा देशमुख ने किया है़ वे सामाजिक न्याय दिन के निमित्य समाजिक न्याय व विशेष सहायता विभाग की ओर से डा़ बाबासाहब आंबेडकर समाजिक न्याय भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थीं.

-शिक्षा क्षेत्रों के कार्य आज भी मार्गदर्शक

देशमुख ने कहा कि, समाज का विकास कर सभी को शिक्षा मिलना चाहिए़ शाहू महाराज ने विविध जाति, धर्म के लोगों तक शिक्षण पंहुचाने के लिए शाला, वसतिगृह् शुरू की़ व उसी प्रकार से शिक्षा के अर्थसहाय्य उपलब्ध होने के लिए शिष्यवृत्ति शुरू की़ राजर्षि शाहू महाराज की शिक्षा क्षेत्रों के कार्य आज भी मार्गदर्शक है़ समाजिक एकात्मता निर्माण होने के लिए भी शाहू महाराज ने किए हुए प्रयास प्रेरणादायी है़ उनके विचार भविष्य के पीढ़ी तक पंहुचाने के लिए सामाजिक न्याय दिन के माध्यम से प्रयास होना चाहिए़ जिलाधिकारी ह्षीकेष मोडक ने कहा की,राजर्षि शाहू महाराज के शिक्षा के बारे में किए कार्य मूलगामी स्वरुप है़ बहुजन समाज के शिक्षण के लिए व समाजिक समता निर्माण होने के लिए शाहू महाराज ने किए हुए प्रयास आज भी मार्गदर्शक बने है़ं

पट्टेबहादुर ने प्रस्तुत की कविता

इस अवसर पर प्रमुखता में जिलाधिकारी ह्षीकेश मोडक, जि.प. समाज कल्याण समिति सभापति पानुताई जाधव, जिला जात प्रमाणपत्र पड़ताल समिति की उपायुक्त डा़ छाया कुलाल समाज कल्याण सहाय्यक आयुक्त माया केदार, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनिल खमितकर, वाशिम न. प. के मुख्यधिकारी वसंत इंगोले, ड़ा. बाबासाहब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार प्राप्त गोपालराव आटोटे, धोंडुजा इंगोले, सु़ ना़ खंडारे, शिवमंगल राऊत,अनंत मुसले, सुमन पट्टेबहादुर, संतोष खडसे, चंद्रभान इंगोले, सोमाणी उपस्थित थे. कार्यक्रम में गोपालराव आटोटे, खंडारे ने विचार रखे़ शाहीर खडसे ने राजर्षि शाहू महाराज के कार्यों बाबत जानकारी देनेवाला कार्यक्रम प्रस्तुत किया़ कविता पट्टेबहादुर ने कविता प्रस्तुत की़ प्रस्ताविक केदार ने किया़ कार्यक्रम का संचालन प्रा़ बारड ने किया. आभार प्रा़ अतुल राऊत ने माना.