अन्याय व अत्याचार के खिलाफ एकजुट होना जरूरी

वाशिम. शाहू, फुले, आंबेडकर की भूमि में जातीयवादी लोगों व्दारा मातंग समाज पर हमले किए जा रहे है. पिछले 4 बर्षों के कार्यकाल में हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. इसलिए समाज बांधवों ने संगठित होकर

वाशिम. शाहू, फुले, आंबेडकर की भूमि में जातीयवादी लोगों व्दारा मातंग समाज पर हमले किए जा रहे है. पिछले 4 बर्षों के कार्यकाल में हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. इसलिए समाज बांधवों ने संगठित होकर अन्याय, अत्याचार के विरोध में आवाज उठाने का आह्वान साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे के पोते सचिन साठे ने ने किया है. वे स्थानीय शासकीय विश्रामगृह में आयोजित पत्र परिषद में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि राज्य में मातंग समाज पर अत्याचार की घटना बढ़ती जा रही है़ लेकिन राज्य सरकार केवल देखने की भूमिका अदा कर रही है. किसी पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हो रही है़ यह सरकार की नीति गलत होकर जातीयवादियों को बल देनेवाली साबित हो रही है. लेकीन अब समाज बांधवों ने एकत्र आकर सामना करने की आवश्यकता निर्माण हो रही है़ हमारे ऊपर होने वाला अन्याय हम ही दूर कर सकते है.

इस अवसर पर चंद्रभान पोलकर, एड़ मानवतकर, आत्माराम सुतार, कैलाश थोरात, केशव लगड, संजय वैरागडे, मोतीराम धबधबाव, युवराज इंगले, उत्तम लगड, प्रभु लगड, सुनिल हिवराले,बनन देवकाते,घनश्याम करडीले, बबन डाखोरे, देवानंद गायकवाड, मोहन दुतोंडे के साथ अन्य समाज बांधव उपस्थित थे.