बाजार समितियों के मताधिकार छीनना किसानों पर अन्याय !

वाशिम. राज्य के किसानों को कृषि उपज बाजार समिति में नेतृत्व का अवसर मिले इस उद्देश्य से 2017 में तत्कालीन भाजपा -शिवसेना की युति सरकार ने किसानों को दिए मताधिकार महाविकास आघाडी की सरकार ने छीन लिए

वाशिम. राज्य के किसानों को कृषि उपज बाजार समिति में नेतृत्व का अवसर मिले इस उद्देश्य से 2017 में तत्कालीन भाजपा -शिवसेना की युति सरकार ने किसानों को दिए मताधिकार महाविकास आघाडी की सरकार ने छीन लिए जिससे किसानों पर एक प्रकार से अन्याय होने का आरोप भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष विधायक राजेंद्र पाटणी ने किया है़ उन्होंने शासन के इस किसान विरोधी नीति का निषेध किया है.

विधायक पाटणी ने कहा कि किसानों के हितों को सामने रखते हुए राज्य में कृषि उपज बाजार समितियां शुरू की थी. लेकिन इस संस्था में किसानों के बजाए विविध कार्यकारी सहकारी संस्था, ग्राम पंचायत व तत्सम संस्था के सदस्यों को ही मतदान का अधिकार दिया गया था़ किसानों की संस्था होकर भी सर्वसामान्य किसानों को प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिलता था़ कुछ विशिष्ट लोग उलट पलट कर इस संस्था के सत्ता का स्वाद चख रहे है़ इन सभी बातों को अंकुश लगाकर सर्वसामान्य किसानों को बाजार समिति ने सत्ता में नेतृत्व करने का अवसर मिले.

अपने अधिकार वाले संस्था के संचालक मंडल के चुनने का उनको अधिकार मिले, इस हेतु वर्ष 2017 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी – शिवसेना के युति सरकार ने इस संस्था के चुनाव में सर्वसामान्य किसानों को मताधिकार बहाल किया था़ जिन किसानों के पास कम से कम 10 आर कृ़षि भूमि है व उन्होंने बाजार समिति में अपने कृ़षि मालों की विक्री की है़ ऐसे सभी किसानों के लिए यह बड़ा मौका था़

ठाकरे सरकार ने बदला निर्णय
इस कारण से किसानों ने राहत की सांस ली थी़ इस निर्णय को तब सरकार में शामिल शिवसेना का समर्थन था़ लेकिन अचानक 22 जनवरी को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार को साक्षात्कार हुआ और उन्होंने बाजार समिति के किसानों को दिया हुआ मताधिकार रद्द ठहराया. किसानों के हितों के लिए खड़ी हुई कृषि उपज बाजार समिति में किसानों को ही मताधिकार से इन्कार करना इससे बड़ा और कोई दुर्भाग्य नही़ं किसान हितों का ढिंढोरा पिटने वाली शिवसेना सिर्फ सरकार चलाने के लिए मित्र पक्षों के दबाव में आकर यह निर्णय लिया गया है़