Agriculture Law: Maharashtra government made its stand clear on agricultural laws, Balasaheb Thorat said - will amend agricultural laws to protect the interests of farmers
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    वाशिंगटन: दो शीर्ष डेमोक्रेटिक सांसदों |(Democratic MPs) ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Foreign Minister Antony Blinken) से भारत (India) में कृषि कानूनों (Agriculture Laws) के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन (Protest) कर रहे किसानों (Farmers) और पत्रकारों के साथ किए जा रहे व्यवहार का मुद्दा उठाने का अनुरोध किया है। सांसदों ने हालांकि कहा कि नए कृषि कानूनों पर आगे कैसे बढ़ना है, इस पर कोई निर्णय भारत के नागरिक और वहां की सरकार ही करेगी।

    ब्लिंकन को लिखे पत्र में सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष बॉब मेनेंडेज और सीनेट में बहुमत के नेता चक शूमर ने गुरुवार को बाइडन प्रशासन (Biden Administration) से अनुरोध किया कि वह भारत में किसानों के साथ हो रहे व्यवहार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के साथ बातचीत करें। उन्होंने कहा कि ये किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं। मेनेंडेज और शूमर ने ब्लिंकन को लिखे संयुक्त पत्र में कहा, ‘‘भारत, अमेरिका का दीर्घकालीन सामरिक साझेदार है जिसका श्रेय हमारे कई साझा मूल्यों और व्यापक भारतीय अमेरिकी समुदाय को जाता है। इन मजबूत संबंधों के चलते किसान प्रदर्शनों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर हम गंभीर चिंता जताते हैं।”

    उन्होंने बाइडन से अपने भारतीय समकक्ष के साथ बातचीत में बोलने की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की महत्ता का मुद्दा उठाने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि विदेश विभाग के अधिकारी भी सभी स्तर पर यह मुद्दा उठाए। विदेश मंत्री बनने के बाद ब्लिंकन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से कई बार बातचीत की है। फोन पर हुई इन बातचीत से यह संकेत नहीं मिलता कि ब्लिंकन ने अपनी पार्टी के दबाव के बावजूद यह मुद्दा उठाया हो।

    शूमर और मेनेंडेज ने कहा कि केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शन वाले इलाकों में इंटरनेट बंद करने, पानी और बिजली की आपूर्ति बंद करने का आदेश दिया और प्रदर्शनों पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के काम में बाधा डाली। सीनेटर ने कहा, ‘‘भारत के नागरिक और सरकार यह तय करेंगे कि इन कानूनों पर आगे का रास्ता कैसे तय करना है और यह फैसला शांतिपूर्ण बातचीत तथा सभी के विचारों का सम्मान करते हुए लिया जाना चाहिए।”