कोरोना: यह वायरस जिंदा जिव नहीं है – रिसर्च

वाशिंगटन. जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस के ऊपर रिसर्च कर इसके बारे में कुछ अहम तथ्य और जानकारी सामने लायी है। रिसर्च के अनुसार कोरोना वायरस कोई जिन्दा जिव नहीं है। यह एक प्रोटीन मॉलिक्यूल

वाशिंगटन. कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचाया है। इस वायरस से दुनिया अब तक सात लाख से भी ज्यादा लोग संक्रमित हुए है। साथ ही कोरोना से दुनिया के 32 हजार से भी अधिक लोगों ने अपनी जान गवाई है। वहीं कोरोना वायरस को लेकर कई बड़ी-बड़ी रिसर्च संस्थाए रिसर्च कर रही है। हालांकि अब तक इस वायरस पर कोई टिका तैयार नहीं हुआ। लेकिन जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस पर रिसर्च कर कुछ अहम तथ्य सामने लाये है। 

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस के ऊपर रिसर्च कर इसके बारे में कुछ अहम तथ्य और जानकारी सामने लायी है। रिसर्च के अनुसार कोरोना वायरस कोई जिन्दा जिव नहीं है। यह एक प्रोटीन मॉलिक्यूल (डीएनए) है। यह फैट की एक परत से घिरा होता है। जब किसी व्यक्ति के आंख, नाक या बुक्कल म्यूकोसा (मुख कैंसर) की सेल्स द्वारा सोखा जाता है तो इसके जेनेटिक कोड को बदल देता है। जिसके बाद यह इसका रूपांतर आक्रामक और मल्टीप्लायर सेल्स में कर देता है। यह समाचार बीबीसी ने दिया है।   

कोरोना का वायरस प्रोटीन मॉलिक्यूल होने के कारण ऐसे में यह मरता नहीं, खुद ही क्षय हो जाता है। यह वायरस बहुत ही अल्पकालिक होता है। इसके ख़त्म होने का समय तापमान, ह्यूमिडिटी, और मटेरियल पर निर्भर होता है। 

कैसे बचे इस वायरस से?

  • कोरोना के वायरस को एक ही चीज बचती है। इसके बाहर एक पतली परत होती है। वही फैट की परत इस वायरस का बचाव करती है। 
  • इस परत को तोड़ने के लिए हैंडवाश, डिटर्जेंट सबसे अच्छा उपाय है। क्योंकि फोम फैट को तोड़ देता है। इसलिए हाथ धोते समय उसे 20 सेकड़ तक अच्छेसे रगड़े ताकि ज्यादा फोम बने। 
  • गर्मी से फैट पिघल जाता है। इसलिए 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म पानी से हाथ धोए। साथ ही कपडे और अन्य चीजे भी ऐसे गर्म पानी से धोना चाहिए।
  • अल्कोहोल भी फैट को गला देता है। अल्कोहोल से बना कोई भी द्रव इस वायरस की परत को तोड़ने में मदद होगी। 
  • ऐसे समय सूखे, बिना आर्दता वाले, गर्म और रोशनी वाले माहौल में रहने से यह वायरस तेजी से टूट जाता है.  
  • म्यूकोसा, फूड, ताले, नॉब्स, स्विच, रिमोट कंट्रोल, सेल फोन, घड़ियां, कंप्यूटर, डेस्क, टीवी को छूने के पहले और बाद में हाथ धोएं.  
  • बार-बार धोने के बाद हाथों को नम करना चाहिए क्योंकि मॉलीक्यूल माइक्रो क्रैक्स में छिप सकते हैं.   
  • साथ ही अपने नाखून छोटे रखिए ताकि वायरस इनके अंदर छिप न सके।  

यह वायरस कहा ज्यादा देर टिका रहता है?

  • इस वायरस का अलग अलग जगहों पर अलग आयुष्मान होता है। जैसे कि, कार्ड बोर्ड पर 24 घंटे, मेटल पर 42 घंटे और प्लास्टिक पर 72 घंटे तक रहता है। 
  • वायरस मॉलिक्यूल ठंड में ज्यादा समय तक टिका रहता है।
  • घर, ऑफिस या कारों में लगे ऐसी में भी बहुत समय के लिए टिका रहता है।
  • खास कर अँधेरे में यह वायरस ज्यादा देर तक टिका रहता है।