Morales's allies claim victory in Bolivia's general election

ला पाज (बोलिविया): बोलिविया (Bolivia) के राष्ट्रपति चुनाव (Election) के लिए रविवार को आधिकारिक नतीजों के रुझान आने के साथ इवो मोरालेस (Evo Morales) की पार्टी ने जीत (Victory) का दावा किया है। बता दें कि वह पिछले साल के चुनाव नतीजों के विपरीत परिणाम आने की उम्मीद कर रहे हैं जिसकी वजह से वाम नेता को पद से इस्तीफा देने के साथ देश छोड़ना पड़ा था।

मतदान प्रक्रिया पूरी होने के नौ घंटे पूरे होने के बाद तक महज छह प्रतिशत मतपेटियों को ही गिनती के लिए खोला गया था जिसमें मोरालेस द्वारा चुने गए लुईस आर्के अपने कर्जवेटिव प्रतिद्वंद्वी से पीछे चलते हुए दिख रहे हैं।

हालांकि, निजी संस्थानों द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में अर्के बड़े अंतर से जीत की ओर बढ़ते दिखाए गए हैं। यहां तक कि मोरालेस के प्रतिद्वंद्वी अंतरिम राष्ट्रपति जीनीन अनैज (Jeanine Anez) ने भी स्वीकार किया है कि समाजवादी आंदोलन सत्ता में लौटता दिख रहा है जिसे दक्षिण अमेरिकी इस देश में धुर वामपंथियों के लिए झटका माना जा रहा है।

अनैज ने ट्वीट किया, ‘‘ मैं विजेताओं को धन्यवाद देता हूं और उनका आह्वन करता हूं कि वे बोलिया और हमारे लोकतंत्र पर ध्यान रखकर शासन करें।” उल्लेखनीय है कि बोलिवियाई मतदाता राष्ट्रपति चुनाव के बाद शीघ्र शुरुआती नतीजों के आदी हैं लेकिन पिछले साल धोखाधड़ी और कई दिनों तक संघर्ष के बाद नव नियुक्त निर्वाचन प्राधिकारी लोगों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं और कह रहे हैं कि विजेता को घोषित करने में पांच दिनों का समय है। अर्जेंटीना में निर्वासित मोरालेस ने अपने संक्षिप्त संदेश में कहा, ‘‘हम अपने लोकतंत्र की बहाली की हैं। लुइस हमारे राष्ट्रपति होंगे।”

इसके साथ ही उन्होंने लोगों के संयंमित रहने की अपील की और कहा कि वह देश में राष्ट्रीय एकता वाली सरकार चाहते हैं। आधिकारिक रुझानों में पूर्व पत्रकार और इतिहासकार मेसा 49 प्रतिशत मतों से आगे चल रहे हैं जबकि आर्के के 33 प्रतिशत मिलते दिख रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मोरालेस को चुनाव लड़ने पर रोक लगी है और स्वदेश आने पर आतंकवाद के मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। बोलिविया राजनीतिक रूप से अस्थिर देश रहा है लेकिन पहले बोलिवियाई मूल के राष्ट्रपति मोरालेस के कार्यकाल में दुर्लभ स्थिरता देखने को मिली।

हालांकि, अधिनियाकवाद व्यवहार और भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से उनका समर्थन क्षीण होता गया और अंतत: उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने राष्ट्रपति के कार्यकाल को सीमित करने के जनमत को खारिज कर दिया और वर्ष 2019 के राष्ट्रपति चुनाव में खड़े हुए जिसके बाद देशभर में संघर्ष शुरू हो गया और सेना एवं पुलिस की सलाह पर मोरालेस को त्यागपत्र देकर देश छोड़ना पड़ा।