पाकिस्तान में बढ़ी गधों की तादाद, चीन भेजकर हो रही मोटी कमाई

    इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan)के विपक्ष ने प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का नया नाम रखा है डंकी राजा। वहां की संसद यानी कौमी बजट के दिन नए नारे से गूंज उठी। डंकी राजा की सरकार, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी। 

    पाक अर्थव्यवस्था का गधों से क्या संबंध है?

    पाकिस्तान में गधों (Donkey) की तादाद बहुत बढ़ गई है। उनकी संख्या सालभर में करीब एक लाख इजाफे के साथ 56 लाख से भी ज्यादा हो गई। इमरान सरकार चीन को गधों का निर्यात करके अच्छी खासी विदेशी मुद्रा कमा रही है। चीन को निर्यात करने लायक वस्तुएं पाकिस्तान के पास ज्यादा नहीं है, लेकिन गधों का निर्यात अच्छा जरिया बन गया है.

    चीन को इतने गधों की जरूरत क्यों है?

    चीन में गधे रखना गर्व की बात है। परंपरागत रूप से वहां गधों से वहां दवा बनाई जाती है। चीनियों का विश्वास है कि गधे की त्वचा से प्राप्त जिलेटिन में औषधीय गुण होते हैं, इससे खून ताकतवर बनता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

    चीन का अर्थशास्त्र

    चीन में औषधीय गुणों वाली जिलेटिन की सबसे मशहूर किस्म इझाऊ है। यह चीन के पूर्वी प्रांत शेनडोंग में ज्यादा उत्पादित होता है। स्थानीय बाजारों में इस जिलेटिन की बिक्री 130 युआन (1500 रुपए)  प्रति किग्रा होती है। चीन में इझाऊ का उत्पादन करने के लिए हर साल लाखों गधों का कत्ल होता है। वर्ष 2017 में इतने ज्यादा गधे मारे गए कि चीन में उनकी तादाद अचानक घट गई। तब चीन ने गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी वाले पाकिस्तान का सहारा लिया। 

    चीन-पाक समझौता

    पाकिस्तान ने चीन से पहले तीन साल में 80,000 गधे निर्यात करने का वादा किया है। चीन की कंपनियां गधा उत्पादन (डंकी फार्मिंग) के लिए 3 अरब डॉलर (225 अरब रुपए) का निवेश करके लिए तैयार हो गईं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और गधों का निर्यात मजाक का विषय बन गए हैं। अच्छी कीमत मिलने के कारण गधे पालने वाले खुश हैं। (एजेंसी)