Swami Vivekananda's lesser-known China visit was highlighted in the documentary

बीजिंग: करीब एक शताब्दी से साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता (Nobel Laureate) रवींद्र नाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) चीन (China) में न केवल सबसे लोकप्रिय भारतीय बने हुए हैं बल्कि सबसे सम्मानित विदेशियों में भी शामिल हैं, लेकिन स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने भी अपनी कम चर्चित चीन यात्रा से यहां उल्लेखनीय छाप छोड़ी है। यह बात स्वामी विवेकानंद की चीन यात्रा पर बने एक वृत्तचित्र में कही गई है।

चीन की लघु यात्रा पर आए विवेकानंद पर बन रहे वृत्तचित्र के लिए काम कर रहे एवं बीजिंग में रह रहे पत्रकार सुवम पाल ने बताया कि वर्ष 1893 में स्वामी विवेकानंद ने तत्कालीन ब्रिटिश शासन के अधीन हांगकांग और चीन के व्यस्त बंदरगाह शहर कैंटन की यात्री की थी जिसे अब ग्वांगझू कहते हैं। उन्होंने बताया कि टैगोर ने अपने जीवन में तीन बार चीन की यात्रा की और यहां उनके बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं। कई ने तो टैगोर की कृतियों का अनुवाद करने के लिए अपना पूरा जीवन बंगाली और अंग्रेजी सीखने में सपर्मित कर दिया।

पाल ने बताया कि कम्युनिस्ट चीन के स्थापना के 60 साल के अवसर पर वर्ष 2009 में कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक टैगोर और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू शीर्ष 50 विदेशी हस्तियों में शामिल हैं जिन्होंने चीन के आधुनिक विकास में सर्वाधिक योगदान दिया। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘ रोचक तथ्य है कि कुछ ही लोगों को पता है कि स्वामी विवेकानंद ने हांगकांग में अल्प प्रवास किया और जून 1893 में उन्होंने तीन दिन वहां बिताए।”

पाल ने कहा, ‘‘यह शिकागो में आयोजित धर्म संसद में हिस्सा लेने और 11 सितंबर 1893 को ऐतिहासिक भाषण देने के लिए अमेरिका जाने की यात्रा के दौरान हुआ।” उन्होंने हाल में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास स्थित स्वामी विवेकानंद संस्कृति केंद्र (एसवीसीसी) और भारतीय ससंस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के लिए सूक्ष्म वित्तचित्र सह टीजर जारी किया है।

मंदारिन और अंग्रेजी भाषा में बने सूक्ष्म वृत्तचित्र एसवीसीसी के सोशल मीडिया हैंडल से शिकागो के ऐतिहासिक संबोधन की सालगिरह पर जारी किया गया। चार मिनट के इस सूक्ष्म वृत्तचित्र में विवेकानंद की लगभग भुला दी गई चीन यात्रा की जानकारी के साथ-याथ चीनी जीनवनशैली, इतिहास और परंपरा की उनकी प्रशंसा शामिल की गई है। स्वामी विवेकानंद को चीनी भाषा में बियान शी फाशी नाम से जाना जाता है। हांगाझू स्थित झीजियांग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर वांग झीचेंग ने कहा, ‘‘विवेकानदं वास्तव में दो शब्दों विवेक जिसे चीनी भाषा में ‘बियान’ और आनंद जिसे चीनी भाषा में ‘शी’ कहते से है बना है।”

वहीं चीनी भाषा में फाशी का मतलब महंत है। गौरतलब है कि विवेकानंद ने 31 मई 1893 को गेट वे ऑफ इंडिया, मुंबई से यात्रा शुरू की थी और कोलंबो, पेनांग और सिंगापुर में अल्प प्रवास के बाद जून के आखिर में हांगकांग के विक्टोरिया बंदरगाह पहुंचे थे। हांगकांग में तीन दिन रूकने के बाद वह जापान के नागासाकी, ओसाका, क्योतो, तोक्यो, कोबे और योकोहामा शहरों से होते हुए कनाडा के वैंकूवर तट पहुचे थे। कनाडा के वैंकूवर शहर से सड़क मार्ग से वह शिकागो पहुंचे थे। (एजेंसी)