China is responsible for the origin of the corona virus, it should be investigated: America

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई सी प्रतीत हो रही हैं। उनके खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने पास कर दिया है। इतिहास देखा जाये तो ट्रंप ऐसे तीसरे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई सी प्रतीत हो रही हैं। उनके खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने पास कर दिया है। इतिहास देखा जाये तो ट्रंप ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिनके ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। इससे पहले भी एंड्रयू जॉनसन और बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग प्रताव लाया जा चुका है।

विदित हो कि स्पीकर नैन्सी पॉलोसी ने डोनाल्ड ट्रंप पर उनके पद का दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए महाभियोग लाने की सिफारिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ,यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर ज़ेलेंस्की पर 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की जांच के लिए दबाव बनाया है. बाइडेन के बेटे उक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी में भी बड़े अधिकारी हैं। इस महाभियोग प्रक्रिया के तहत ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर ज़ेलेंस्की के बीच हुई फ़ोन वार्ता की जांच की गयी थी और डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली न्यायिक समिति ने उनके ख़िलाफ़ औपचारिक आरोप तय कर दिए हैं। 

क्या कहता है नियम: 
देखा जाये तो नियमानुसार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में प्रस्ताव पास होने के बाद  ये सीनेट में जाता है, जहां पर राष्ट्रपति पर लगाए गए आरोपों का एक ट्रायल होता है। ट्रायल के बाद सीनेट  इन प्रस्तावों पर मतदान करते है। अगर वोटिंग में प्रस्ताव गिर जाता है, तो राष्टपति अपने पद पर बरकरार रहते हैं। लेकिन अगर यह पास होता है, तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है और उपराष्ट्रपति उनकी जगह ले लेते हैं । 
 
अब चूँकि डेमोक्रेट सांसदों के बहुमत वाले अमरीकी संसद के निचले सदन ने 197 के मुक़ाबले 230 मतों से महाभियोग को मंज़ूरी दे दी है, तो अब इसके बाद अगले महीने ये मामला संसद के ऊपरी सदन में जाएगा मगर सेनेट पर रिपब्लिकन सांसदों का पूरा वर्चस्व है है। जिसके चलते राष्ट्रपति ट्रंप को उनके पद से हटाया जाने की संभावनाएं बहुत ही कम होंगी।उधर राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि संसद उनके ख़िलाफ़ जल्द से जल्द महाभियोग की प्रक्रिया पूरी करे। महाभियोग प्रस्ताव पास होने के बाद व्हाइट हाउस ने भी अपने बयान में कहा कि , “राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी उम्मीद है कि सीनेट सही तरीके से इस प्रक्रिया को पूरा करेगी। हालाँकि निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पूरा नहीं किया गया है। लेकिन आगे की जो भी प्रक्रिया होगी, उसके लिए राष्ट्रपति तैयार हैं। ’’
 

ये भी प्रासंगिक होगा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ दो तिहाई बहुमत के साथ अभियोग सिद्ध हो जाते हैं तो वह अमरीकी इतिहास में महाभियोग की प्रक्रिया के चलते पद से हटाए जाने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे। जिसकी संभावनाएं बहुत ही कम दिखाई दे रही है क्यूंकि सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों का ही बोलबाला है।आपको ये भी बता दें कि अमरीका के इतिहास में केवल दो राष्ट्रपतियों, सन 1886 में राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन और 1998 में राष्टपति बिल क्लिंटन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका था। वहीं 1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था जिसे हम वॉटरगेट स्कैंडल के नाम से जानते हैं। लेकिन ये भी प्रासंगिक है कि महाभियोग चलाने से ठीक पहले उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकिवह अचे से जानते थे कि अगर यह मामला सीनेट तक पहुंचा तो उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ सकता है।