Pfizer's corona vaccine effective in protecting against new mutation strain: Research
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नयी दिल्ली.  ख़बरों की मानें तो यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) ने फाइजर और बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अमेरिका और यूरोपीय संघ के इस फैसले से पहले फाइजर और बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी देने वाला यूनाइटेड किंगडम अब पहला पश्चिमी देश बन गया है। ख़बरों के मानें तो उक्त कोरोना वैक्सीन अगले हफ्ते से ही ब्रिटेन (Britain) में उपलब्ध हो जाएगी।

जी हाँ, ब्रिटेन, दवा कंपनी फाइजर-बायोएनटेक के कोविड-19 टीके को मंजूरी देने वाला पहला देश बन गया है। इससे घातक कोरोना वायरस को काबू करने के लिए व्यापक पैमाने पर टीकाकरण की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है। ब्रिटेन की दवा और स्वास्थ्य उत्पाद नियामक एजेंसी (एमएचआरए) ने बताया कि यह टीका उपयोग में लाने के लिए सुरक्षित है। दावा किया गया था कि यह टीका कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए 95 प्रतिशत तक असरदार रहा है। प्रसिद्ध और प्रमुख अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने साथ मिलकर इस टीके को विकसित किया है। 

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही फाइजर कंपनी ने यह ऐलान किया था कि वो अपने लैब में कोरोना की ऐसी वैक्सीन बनाने में सफल हुई है, जो कि कोरोना वायरस पर 96% असरदार है। इसके साथ ही बीते मंगलवार को जर्मनी की बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी बायोएनटेक और उसकी अमेरिकी साझेदार फाइजर ने यूरोपिया संघ के सामने वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए अपना औपचारिक आवेदन पेश किया था।

कंपनी ने हाल ही  में दावा किया था कि परीक्षण के दौरान उसका टीका सभी उम्र, नस्ल के लोगों पर कारगर रहा। ब्रिटेन सरकार ने एमएचआरए को कंपनी द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों पर गौर कर यह देखने को कहा था कि क्या यह गुणवत्ता, सुरक्षा और असर के मामले में सभी मानकों पर खरा उतरता है। 

वहीं अब ब्रिटेन की मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (MHRA) से फाइजर और बायोएनटेक कोरोना वायरस वैक्सीन का आकलन करने की मंजूरी दे दी है। अब उक्त एजेंसी यह भी निर्धारित करने की प्रक्रिया में है कि क्या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कठोर सुरक्षा मानकों को पूरी करती भी है या नहीं।

उधर ब्रिटेन के मंत्री नादिम जहावी के हवाले से जारी एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार सफल रहा और फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित वैक्सीन को प्राधिकरण की जरुरी मंजूरी मिलती है तो उसके कुछ ही घंटों में वैक्सीन का वितरण और टीकाकरण का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है की फाइजर के अध्यक्ष और सीईओ डॉ अल्बर्ट बोरला ने कहा था कि, “यह विज्ञान और मानवता के लिए बड़ा दिन है। तीसरे चरण के ट्रायल के परिणामों के पहले सेट से यह स्पष्ट होने लगा है कि कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी यह वैक्सीन अच्छी तरह से कारगर है। हम वैक्सीन तलाशने में अब एक नया आयाम स्थापित कर रहे हैं। यह समय ऐसा है जब कोरोना वायरस वैक्सीन की जरूरत पूरे विश्व को है।”

वहीं कंपनी के मुताबिक, इस ट्रायल में ‘फाइजर की वैक्सीन’ कोरोना को रोकने में 90% से ज्यादा प्रभावी नजर आई है। इस ट्रायल में कोरोना के 94 मामलों की पुष्टि की गयी थी। इस स्टडी में 43,538 प्रतिभागी शामिल थे, जिनमें से 42% वे थे जिन्होंने कोरोना के लिए से ज्यादा एहतियात नहीं बरते थे। फिलहाल इस संबंध में और आंकड़े जुटाए जाने का इन्तेजार हैं।अगर सब कुछ योजनुसार रहा तो शायद ब्रिटेन अपने देशवासियों को कोरोना वैक्सीन देने वाला पहला देश बन जायेगा। 

ब्रिटेन को 2021 के अंत तक दवा की चार करोड़ खुराक मिलने की संभावना है। इतनी खुराक से देश की एक तिहाई आबादी का टीकाकरण हो सकता है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैंकॉक ने पिछले महीने कहा था कि नियामक से मंजूरी मिल जाने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) टीकाकरण करने के लिए तैयार है। एनएचएस के पास टीकाकरण का व्यापक अनुभव है और उसके पास सारी व्यवस्थाएं भी हैं। टीके का उत्पादन बायोएनटेक के जर्मनी स्थित केंद्रों के साथ ही फाइजर की बेल्जियम स्थित यूनिट में किया जाएगा।