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    पूरी दुनिया कोरोना महामारी (Corona Epidemic) से जूझ रही है। कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave) तबाही मचा रही है। ऐसे में सरकार लोगों से मास्क पहनने (Mask) और सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करने की अपील कर रही है। सभी देशों में कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) को लेकर तेजी देखी जा रही है। सरकार (Government) लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए कई ऑफर भी दे रही है। अब दुनियाभर के देशों में सरकार ने संक्रमण को रोकने के लिए लोगों की एक देश से दूसरे देश में आवाजाही के लिए कुछ नियम और कानून लागू कर रही है। जिसे यह कोरोना महामारी को फैलने से रोका जा सके। अब भविष्य में यात्रा (Travel) करने के लिए यात्रियों को वैक्सीन पासपोर्ट (Vaccine Passport) भी अनिवार्य किया जायेगा। जब आप भविष्य में विदेश यात्रा करेंगे तो आपको बोर्डिंग पास (Bording Pass), सूटकेस(Suitcase), पासपोर्ट (Passport) के साथ ही वैक्सीन पासपोर्ट  (डिजिटल वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट) (Digital Vaccination Certificate) होना जरूरी होगा। यह कानून इसलिए लागू किया जाएगा ताकि जब लोग घूमने या काम के मकसद से दूसरे देशों में जाए तो उन्हें वहां लंबा वक्त क्वारंटाइन में ना बिताना पड़े।

    इसकी शुरुआत और तैयारियां-

    इसमें यात्रियों के टीकाकरण की स्थिति और संक्रमित होने वालों के ठीक होने की जानकारी दी जाएगी। प्रमाण पत्र के आधार पर वे ईयू देशों के बीच सफर कर पाएंगे।

    ईयू का प्रमाणपत्र एक क्यूआर कोड की तर्ज पर होगा जिसे जांच अधिकारी स्कैन करेगा और ईयू के तकनीकी गेटवे के जरिये यात्री के देश की आधिकारिक एजेंसी के डाटा से टीकाकरण और संक्रमण की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा

    ब्रिटेन ने बीते सप्ताह यात्रा नियमों में ढील देते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा एप को अपडेट किया है। इसके माध्यम से विदेश यात्रा के दौरान व्यक्ति के टीकाकरण की स्थिति का सत्यापन किया जा सकेगा।

    यूरोपीय यूनियन (ईयू) भी इसी तरह के एक डिजिटल प्रमाणपत्र पर काम कर रहा है। ईयू के 30 सदस्य देशों के नागरिकों के लिए यह जून के आखिर तक उपलब्ध होने की संभावना है।

    चीन और जापान विदेश यात्रा के लिए अपने-अपने प्रमाणपत्र जारी करने की तैयारी कर रहे हैं। 

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का पक्ष 

    टीकों के असमान वितरण की दलील देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) फिलहाल टीकाकरण के प्रमाण को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए अनिवार्य दस्तावेज बनाए जाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि वह स्मार्ट वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट के संबंध में अंतरिम दिशा-निर्देश बनाने की तैयारी जरूर कर रहा है। 

    लागू होने में चुनौतियां

    पहले से ही कोरोना के इलाज और संक्रमितों को ट्रेस करने के लिए कई अलग-अलग देश अपना-अपना एप चला रहे हैं। ऐसी स्थिति में वैक्सीन पासपोर्ट एक और डिजिटल दस्तावेज होगा।

    सबसे बड़ी बाधा टीकाकरण के सत्यापन के लिए एक केंद्रीकृत अंतरराष्ट्रीय सत्यापन व्यवस्था का नहीं होना है। कई देशों का एक साथ काम करना तकनीकी लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण है। निजता और वैक्सीन के नाम पर भेदभाव जैसे सवालों के बीच यह चुनौती और बढ़ जाती है।