आखिर क्यों रूस में कुत्तों का रंग हो रहा नीला? भारत में भी 4 साल पहले हो चुका है ऐसा, देखें Photos

    कुत्ता दुनिया का इकलौता ऐसी जीव है जिसे सबसे ज्यादा प्यार, गाली और तिरस्कार मिलता है। कुत्ते कई तरह और कई रंगों के होते हैं। पर क्या आपने कभी नीले या हरे रंग का कुत्ता देखा है क्या? जी हां रूस (Russia) के एक शहर में नीले और हरे रंग के कुत्ते देखने को मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पहले इनका रंग भूरे या किसी अन्य रंग के थे लेकिन धीरे-धीरे उनका रंग नीला या हरा हो गया। बता दें कि ऐसी घटना 4 साल पहले भारत में भी हो चुकी है। (फोटोः रिया नोवोस्ती)

    सरकारी मीडिया संस्थान रिया नोवोस्ती की रिपोर्ट के अनुसार राजधानी मॉस्को से 370 किलोमीटर पूर्व दिशा में जेरजिंस्क (Dzerzhinsk) नाम का शहर है। यहां नुकसानदेह रसायनों की वजह से कुत्तों के ऊपर नीला और हरा रंग चढ़ रहा है। खाली पड़े केमिकल प्लांट में मौजूद रसायनों की वजह से कुत्ते अपना रंग बदल रहे हैं। इस मुद्दे पर अब जानवरों और कुत्ते के लिए काम करने वाली संस्थाएं आवाज उठाने लगे हैं।(फोटोः मॉयसेस लोपेज/’ट्विटर)

    ‘द मॉस्को टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार केमिकल प्लांट पहले प्लेक्सीग्लास (Plexiglass) और हाइड्रोसाइनिक एसिड (Hydrocyanic Acid) का उत्पादन करता था। जिसके कारण वहां के पानी में हाइड्रोजन सायनाइड (Hydrogen Cyanide) घुल चूका है। यह बेहद जहरीला रसायन है, जो कई तरह के घातक पॉलीमर्स को बढ़ा सकता करता है।(फोटोः ट्विटर)

    वैज्ञानिकों का मानना है कि कुत्तों के फर यानी उनके झबरीले बाल कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) रसायन की वजह से रंग बदला है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं पता कर पाए हैं कि नीला रंग चढ़ने की सटीक वजह क्या है। उन्होंने ये जरूर बताया कि औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाला अकार्बनिक रसायन कुत्तों के फर का रंग बदलकर उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।(फोटोः ट्विटर)

    केली ओ मारा ने बताया कि रूस की सरकार के तरफ से कुत्ते के बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।ना ही इन केमिकल प्लांट पर कोई कार्यवाही की जा रही है। जबकि यहां कुत्तों की आबादी रोकने के लिए क्रूरतापूर्ण तरीके अपनाए जाते हैं। रूस में कुत्ते की नसबंदी करने के तौर-तरीकों को बदला जाना चाहिए। कुत्तों का नीले रंग में बदलना एक औद्योगिक हादसा और अपराध दोनों है। प्लांट के मैनेजर आंद्रे मिसलिवेट्स इस अपराध के लिए जिम्मेदार हैं। उनकी गैर-जिम्मेदाराना हरकत की वजह से कुछ साल पहले भी कुत्तों का रंग बदला था।

    केली का मानना है कि यह इलाका बर्फीला है। यहां पर रसायन जल्दी खत्म नहीं होता। कुत्ते बर्फ में खेलते हैं। इसी खेलकूद के दौरान वो रसायनों से लिपटे बर्फ में गए होंगे, जिनकी वजह से उनका रंग नीला हो रहा है। अगर इसी तरह से चलता रहा तो इस इलाके के सारे कुत्तों का रंग नीला हो जाएगा। शहर के सभी आवारा कुत्तों के सेहत की जांच करानी चाहिए और प्लांट के बचे हुए रसायनों को साफ कराना होगा।

    गौरतलब हो कि, साल 2017 में भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी नीले रंग के कुत्तों को देखा गया था। ये कुत्ते उस नदी में नहाकर निकले थे, जिनमें एक स्थानीय फैक्ट्री द्वारा क्लोराइड भारी मात्रा में फेंका जाता था। हालांकि, बाद में फैक्ट्री को बंद कर दिया गया था। यह घटना मुंबई तालोजा इंडस्ट्रियल इलाके में स्थित कसादी नदी की है। घटना अगस्त के महीने में दर्ज की गई थी।