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    नई दिल्ली. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बीते सोमवार को पाकिस्तान से 7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम की नौवीं समीक्षा पर वार्ता से पहले अपने खर्च कम करने को कहा है। दरअसल यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट में सामने आई है। ऐसी भी खबर है, IMF अब पाकिस्तान (Pakistan) के वित्त मंत्रालय और संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) के प्रदर्शन से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और उसने उन्हें खर्च कम करने की मांग भी रखी है।

    पहले भी मिली है मदद

    गौरतलब है कि, इसके पहले बीते अगस्त 2022 को, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यकारी निदेशक ने पाकिस्तान (Pakistan) के विस्तारित कोष सुविधा (EAF) कार्यक्रम को फिर से बहाल करने की जरुरी मंजूरी दे दी थी। इस फैसले के चलते पाकिस्तान को 7वीं और 8वीं किस्त के रूप में 1.17 अरब डॉलर उधार मिले थे। बता दें की इसके पहले पाकिस्तान और IMF ने बीते जुलाई, 2019 में 6 अरब डॉलर का समझौता किया था लेकिन जनवरी, 2020 में यह कार्यक्रम अटक गया और इस साल मार्च में इसे कुछ समय के लिए इसे फिर बहाल किया गया।

    पाकिस्तान फैला रहा हाथ 

    लेकिन अब जब IMF एक बार फिर पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय और संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) के प्रदर्शन से खफा दिख रहा है। ऐसा में  आने वाले समय में पाकिस्‍तान में महंगाई और भी बढ़ सकती है। इसकी वजह है कि सरकार पेट्रोल के दाम के अलावा कर का बोझ भी आम आदमी पर बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं गरीबों के लिए जरुरी स्‍कीम को भी बंद कर दिया जाएगा।  

    अमेरिका की मज़बूरी 

    वहीं अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान अब तक चीन, सऊदी अरब, कतर और UAE से ऋण, वित्तपोषण, अस्थगित तेल भुगतान और 12 बिलियन अमरीकी डालर के करीब निवेश प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने में कामयाब रहा है। हालांकि कई मतभेदों के बाद भी अमेरिका अभी भी IMF के माध्यम से अब तक पाकिस्तान ऋण का समर्थन करता रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह अफगानिस्तान की सीमा पर फिलहाल कोई भी संकट नहीं देखना चाहता है।