वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की बढ़ी मांग, सिंगापुर में नर्स की भारी कमी

    सिंगापुर: कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की बढ़ती मांग के बीच सिंगापुर के अस्पतालों और क्लीनिक में नर्स की इतनी कमी हो गई है कि एक निजी अस्पताल समूह ने अनुभवी नर्स ढूंढने और उनकी भर्ती में मदद करने वाले कर्मियों को 12-12 हजार सिंगापुर डॉलर देने का प्रस्ताव दिया है। यहां मीडिया ने बृहस्पतिवार को बताया कि अस्पताल ने हाल में स्नातक करने वाली नर्स ढूंढने और उनकी भर्ती में मदद करने वाले कर्मी को भी कम से कम 3,600 सिंगापुर डॉलर देने का प्रस्ताव दिया है।

    कोविड-19 ने नर्स की कमी की समस्या को और गंभीर कर दिया हैं। निजी अस्पताल समूह के एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ से कहा, ‘‘हर जगह नर्स की भारी मांग है।” उसने कहा, ‘‘विदेशी नर्स सिंगापुर में अनुभव लेकर कनाडा जैसे देशों में बेहतर नौकरियों के लिए चली जाती हैं, क्योंकि सिंगापुर में उन्हें स्थायी निवास मिलने की उम्मीद बहुत कम होती है। यहां उनका कोई भविष्य नहीं है।” सिंगापुर में पहली बार पिछले साल नर्स की संख्या में कमी आई और इस साल स्थिति और भी खराब है।

    कई स्वास्थ्यकर्मियों ने वैश्विक महामारी के दौरान अत्यधिक दबाव और कार्य के अत्यधिक घंटों के कारण इस्तीफा दे दिया, जबकि कुछ विदेशी नर्स स्वदेश या किसी अन्य देश चली गईं। आईएचएच हेल्थेकेयर सिंगापुर के मुख्य परिचालन अधिकारी डॉ. नोएल येओ ने कहा, ‘‘हमारे कई विदेशी कर्मी किसी अन्य देश चले गए या स्वदेश लौट गए।

    जो स्थानीय कर्मी बचे हैं, वे कार्य के अत्यधिक घंटों के कारण थक चुके हैं और उन्हें विश्राम की आवश्यकता है।”आईएचएच हेल्थेकेयर सिंगापुर के तहत चार अस्पताल आते हैं। इसी कारण अस्पताल समूह को और नर्स को ढूंढ़ने और उन्हें भर्ती कराने वाले कर्मियों को शुल्क देने का प्रस्ताव देना पड़ा। 

    नेशनल हेल्थ केयर ग्रुप (एनएचजी) की ग्रुप चीफ नर्स एसोसिएट प्रोफेसर योंग केंग क्वांग ने ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ से कहा कि कोविड -19 के मामलों में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मियों की मांग बढ़ती है और ऐस में कर्मियों के इस्तीफा देने से दिक्कत होती है। इस बीच, सिंगापुर में बुधवार को संक्रमण के 2,079 नए मामले सामने आए और छह लोगों की मौत हो गई। देश में अब तक 2,57,510 लोगों की मौत हो चुकी है और 678 लोगों की मौत हो चुकी है। (एजेंसी)