Tur, Cotton nd Soybean

    यवतमाल . जिले में बारिश ने इस वर्ष मृग नक्षत्र के पहले दिन ही जोरदार दस्तक दी. जिले में जून में औसत से अधिक बारिश हुई. इसके चलते जिले के अधिकांश किसानों ने बुआई कार्य भी निपटा लिए. जिले में लगभग 63 फीसदी बुआई कार्य पूरे हो चुके हैं. जिले में 9 लाख 1,997 हेक्टेयर अपेक्षित बुआई क्षेत्र हैं. इनमें से अब तक 5 लाख 69 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की गई. सफेद सोने के जिले के रूप में पहचाना जाता है. जिले में कपास की सबसे अधिक 3 लाख 12,110 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की गई है. 

    कलंब तहसील में सर्वाधिक बुआई

    इस वर्ष जून में औसत से अधिक बारिश हुई. जिले में 120 मिमी बारिश होना अपेक्षित था, किंतु प्रत्यक्ष में 231 मिमी बारिश हुई. औसत के मुकाबले 192 प्रश बारिश जिले में हुई. इसके चलते किसानों ने तुरंत बुआई कार्य निपटा दिए. यवतमाल में 42490. बाभुलगांव में 27075, कलंब में 44259, दारव्हा में 34480, दिग्रस में 36790, आर्णी में 40635, नेर में 25535, पुसद में 37530, उमरखेड़ में  44049, महागांव में 27862, वणी में 33078, मारेगांव में 41443, झरी में 42890, केलापुर में 32245, घाटंजी 37962 और रालेगांव में 26201 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास, सोयाबीन, तुअर, ज्वार, मूंग, उड़द आदि फसलों की बुआई की गई.  जिले में सबसे अधिक कलंब तहसील में बुआई की गई. जबकि सबसे कम रालेगांव तहसील के किसानों ने बुआई की.  

    बारिश की बेरूखी से बढ़ी चिंता 

    वणी (सं). पिछले कुछ दिनों में वणी तहसील के कई हिस्सों में हुई बारिश ने मौसम सीजन के सभी पूर्वानुमानों को खारिज कर दिया है. बारिश की बेरूखी से किसानों में चिंता बढ़ गई है. कुछ क्षेत्रों में कम बारिश हो रही है, किंतु खंडित स्वरूप की है. एक तरफ जहां करीब 70 फीसदी बुआई पूरी हो चुकी है, किंतु बारिश ने किसानों को बुरी तरह प्रभावित किया है.

    इस सीजन में अब तक 150 मिमी बारिश हो चुकी है. बारिश हुई है और वर्तमान में बोए गए बीजों के लिए उपयुक्त है. अगले 8 दिनों तक बारिश नहीं हुई है, किंतु किसानों को चिंता की कोई बात नहीं है. एक-दो दिन में बारिश नहीं हुई तो बोए गए बीजों को नुकसान होने की आशंका किसानों ने व्यक्त की है. मौसम विभाग ने इस साल अच्छी बारिश का अनुमान जताया था. 

    पहली बारिश में ही कर दी थी बुआई

    मौसम विभाग ने दावा किया था कि जल्द ही मानसून आ जाएगा. पहली जून सप्ताह से बहुत बारिश होने लगी थी. बारिश थमने के साथ ही किसानों ने बुआई शुरू कर दी है. इस पहली बारिश के आधार पर करीब 50 फीसदी किसानों ने कपास, सोयाबीन और हल्दी के बीज खेत में लगाए.

    मिट्टी में नमी के कारण भी बीज अंकुरित हुए हैं. भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में बीज दबने की शिकायतें आ रही हैं. अभी कई इलाकों में फसल की स्थिति अच्छी है, बुआई अभी पूरी नहीं हुई है. बारिश इसी उम्मीद में किसान बुआई कर रहा है. पिछले तीन-चार दिनों से क्षेत्र में आवश्यक बारिश नहीं हुई है. इसके विपरीत किसान सोच रहे हैं कि दिन का तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.

    वणी में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें कपास, सोयाबीन और अरहर हैं. पिछले साल हुई भारी बारिश से सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान हुआ था. इस वजह से इस साल बीज की किल्लत हो गई है. नतीजतन इस साल क्षेत्र में सोयाबीन के रकबे में गिरावट आई है.

    वणी क्षेत्र में आए दिन बादल छाए रहते हैं, फिर से बारिश नहीं हो रही है. बारिश नहीं होने से कई किसानों की सोयाबीन की बुआई ठप है. सोयाबीन की बुआई के लिए अच्छी बारिश की जरूरत है. हालांकि, वणी तहसील में बारिश की कमी के कारण सोयाबीन की बुआई में देरी हुई है.