Soybean and Cotton

    • 4.52 लाख में कपास की बुआई, सोयाबीन पर जताया भरोसा

    यवतमाल. अमरावती संभाग में जिले में कपास का सबसे अधिक 4 लाख 52 हजार हेक्टेयर में कपास का रकबा है. अमरावती संभाग के 5 जिलों में खरीफ की बुआई 92 फीसदी पूरे कर लिये हैं. इसमें यवतमाल जिले में 95 प्रतिशत बुआई कार्य पूरे हो गये हैं. जबकि वाशिम में 100 प्रश बुआई कार्य पूरे कर लिए गए हैं. कपास फसल पर इल्लियां हमला कर देती है. जिसकी वजह से किसान कपास के प्रति ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई दी है.

    कपास को लेकर किसानों में उदासीनता

    अमरावती में 97, अकोला 75, बुलढाना 92 फीसदी बुआई पूर्ण कर ली गई है. कपास उत्पादक पांचों जिलों में इस वर्ष कपास का बुआई क्षेत्र फिलहाल कम दिखाई दे रहा है, वही सोयाबीन को किसानों ने अधिक पसंद किया है. संभाग में कपास की बुआई 9 लाख 16 हजार हेक्टेयर में वही सोयाबीन की 12 लाख 10 हजार हेक्टेयर में हुई है.

    गत कुछ वर्ष से कपास को उचित दाम नहीं मिलने व उस पर विविध इल्लियों के प्रकोप से किसान कपास को पहले के मुकाबले कम तवज्जों देने लगे हैं. इसके बावजूद जिले में इस बार 4 लाख 52 हजार हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है. वहीं लाख 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई की गई है. अन्य फसल में तुअर, मूंग, उड़द को भी किसानों ने पसंद किया है.  

    कपास व सोयाबीन का बढ़ा रकबा 

    किसान संगठन के पदाधिकारी ने बताया कि गत मौसम में सोयाबीन को अच्छा दाम मिला. इससे इस बार किसानों ने सोयाबीन को अधिक पसंद किया है. कपास पर गुलाबी बोंड इल्लियों के चलते फसल पर बुरा असर हुआ, वहीं कपास के दाम भी कम हो गए थे, इसलिए किसान इस वर्ष बुआई के समय असमंजस में थे, फिर भी कपास एवं सोयाबीन को किसानों ने खेत में बराबरी में लगाया है.

    कपास और तुअर नकद फसल है. सोयाबीन को अंतिम समय में अधिक दाम मिले थे पर तुअर की भी मांग रही. कपास के लिए किसानों में निराशा थी, इसके बावजूद इस वर्ष जिले में कपास, सोयाबीन का ही रकबा अधिक है.