90 Q. in the division Sowing settlement, Yavatmal topper, Akola lagging behind

  • बांझ सोयाबीन बीज से किसानों की बढी आर्थिक दिक्कते

यवतमाल. इस

में बुआई किए सोयाबीन बीज में से 80 फिसदी बीज अंकुरीत नही हुए. जिससे किसानों को ठगने का मामला उजागर होने पर भी जनप्रतिनिधी और कृषी विभाग ने बेसहारा छोड दिया है. कोई तो खेतों में  पंचनामा करने आएगा ऐसी प्रतक्षिा किसानों को है. सरकारी कंपनी महाबीज समेत अंकुर, ईगल, सारस ने सर्टिफाईड किए सोयाबीन बीज निकृष्ट निकले. इन कंपनीयों पर तुरंत फौजदारी कार्रवाई करें ऐसी मांग किसान नेता कर रहे है. तो किसान अब दुबार बुआई के लिए आर्थिक दक्कितों में फंसा हुआ है. कृषीकेंद्र चालक बीज कंपनीयों के अधिकारी खेत में आकर निरक्षिण करेगे ऐसा बोल रहे है. तो कृषी विभाग में जन्हिोने शिकायतें की वे पंचनामा के लिए कृषी विभाग के अधिकारी खेती में आएगे इस प्रतक्षिा में है. लेकिन कृषी विभाग का कोई अधिकारी किसानों के लिए उपलब्ध नही है.

अधिकारी नॉट रिचेबल
 कृषी अधक्षिक समेत जम्मिेदार अधिकारी नॉट रिचेबल हुए है. दुसरी ओर जनप्रतिनिधि का किसानों की ओर ध्यान नही है. जिससे हमारा वाली कोई नही ऐसी भावना किसानों के मन में नर्मिाण हो रही है. इस वर्ष बारीश ने समय पर दस्तक देने से किसानों ने उत्साह से बुआई की. लेकिन बीज कंपनीयों झुठेपन की फटकार किसानों को बैठी है. 

आसान नही कानुन का मार्ग
इसके विरोध में किसानों के लिए कानुन का मार्ग काफी पेचिंदा है. पहले पंचनामा कर इसके खिलाफ ग्राहक मंच में न्याय मांगना होगा. इसके बाद कई वर्ष तक चलनेवाला मामला इस मार्ग से किसान गया तो वह आर्थिक एवं मानसिक समस्याओं से टुट जाएगा.

पहले ही बताया था, बीज अंकुरीत नही होगे
सरकार इस बात को गंभीरता से लेकर इस मामले की जांच करें, दोषी कंपनीयों का स्टॉक सील कर उनके लाइसेंस रद्द करना जरूरी है. इस बार घर के और प्रमाणित बीज की बुआई क्षमता कम रहेगी ऐसा अंदजा था, गत वर्ष  सोयाबीन गीला होने से बीज अंकुरीत  नही होगे ऐसा बताया गया था, ऐसा कृषी वश्विवद्यिालय के सहयोगी प्राध्यापकों ने स्पष्ट किया.

किसानों के सामने आर्थिक संकट
कोरोना की वजह से किसान पहले ही आर्थिक समस्या में है. इस मौसम में  अधिकतर किसानों को कर्ज नही मिला, साथही कर्जमाफी का  लाभ भी कुछ ही किसानों को मिला है. जिससे अब दुबार बुआई के लिए किसानों के सामने आर्थिक संकट नर्मिाण हुआ है.