Amol Yedge, District Magistrate

    यवतमाल. भविष्य में कोविड मरीजों को विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें. ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल, छात्रावास, बड़े हॉल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के लिए बड़ी संख्या में आइसोलेशन रूम स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं. जिन्हें होम आइसोलेशन में रहने में कठिनाई होती है. हल्के लक्षण होते हैं. वर्तमान में मरीजों की संख्या में कमी आ रही है, लेकिन किसी को बेफिक्र होकर नहीं रहना है. कोरोना की श्रृंखला को तोड़ने ब्रेक द चेन के तहत टेस्ट और कार्यान्वयन में निरंतरता की आवश्यकता है. जिलाधिकारी अमोल येडगे ने वीसी के माध्यम से जिले के सभी उप-मंडल और तहसील प्रशासन की ओर से कोरोना प्रतिबंधात्मक उपायों के संबंध में की गई कार्रवाई की समीक्षा की.

    नया DCHC शुरू करने योजना बनाएं 

    जिलाधिकारी ने कहा कि सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टीकाकरण की सभी टीके एक ही दिन में पूरी कर ली जाएं. सोशल मीडिया, वाट्सएप आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक करें. किसी के कार्यक्षेत्र में सकारात्मकता न बढ़े और मृत्यु दर कम रहे. ग्राम समितियां सतर्क रहें ताकि नियमानुसार मकान अलग होने पर भी मरीज नियम नहीं तोड़ें. पीएचसी को बुखार, ओपीडी में आने वाले मरीजों का पूरा रिकॉर्ड रखना चाहिए. लक्षणों वाले मरीजों के साथ-साथ निजी स्थान पर भी जांच की जानी चाहिए. हाई रिस्क, लो रिस्क की जांच होनी चाहिए. सभी सुविधाओं के साथ नया डीसीएचसी शुरू करने की योजना बनाई जाए. आक्सीजन की कमी नहीं हो इसका ध्यान रखा जाए. 

    ब्लैक फंगस को लेकर जनजागृति की जरूरत

    ब्लैक फंगस के बारे में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है. उन्होंने सुझाव दिया कि ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण मिलते ही नागरिकों को बिना समय बर्बाद किए स्वास्थ्य प्रणाली से संपर्क करना चाहिए. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में टेस्टिंग कम न हो. वर्तमान में, परीक्षण इरादा के अनुसार काम कर रहा है. स्वास्थ्य विभाग को अब टीकों का वितरण करते समय टास्क फोर्स की मंजूरी नहीं लेनी चाहिए. टीका प्राप्त करने के 1 दिन के भीतर पूरा किया जाना चाहिए. बैठक की अध्यक्षता मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल ने की. इस अवसर पर निवासी उपजिलाधिकारी ललित कुमार व-हाड़े, जिला सर्जन डा. तरंगतुषार वारे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरि पवार आदि उपस्थित थे.