व्यवसाय: मुर्गी दाने में 25 से 30 प्रश तक हुई वृद्धि, डीजल के दाम बढ़ने का दिखा असर,मुर्गी पालक हो रहे कंगाल, लागत बढ़ने से मुनाफे में आई कमी

    यवतमाल. एक तरफ सरकार दूध और पोल्ट्री फार्म को किसानों के लिए पूरक व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है. वहीं दूसरी ओर मुर्गी पालन की लागत में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है. पोल्ट्री बिजनेस में लागत बढ़ने से मुनाफे में कमी आयी है. महंगे डीजल का असर मुर्गी दाने पर भी पड़ा है. मुर्गी दाना में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

    इसमें मक्का, मूंगफली की ढेप, सोयाबीन, ज्वार, बाजार सहित अन्य चीजें शामिल है. पिछले वर्ष के मुकाबले सभी में 8 से 10 रुपये भाव बढ़े है. बढ़ती महंगाई के कारण मुर्गी पालक सरकारी मदद के बिना कंगाली के कगार पर पहुंच चुके हैं. वहीं बीच में कोरोना के साथ आये बर्ड फ्ल्यू ने कई पोल्ट्री फार्म्स पर ताले लगा दिए हैं. पोल्ट्री व्यवसायियों पर नौबत ऐसी आई कि उन्हें अपना घर बेचकर खर्चा चलाना पड़ा. 

    इन दिनों व्यवसायियों के लिए बना घाटे का सौदा

    मुर्गी दाना में सबसे महंगा सोयाबीन का दाना हुआ है. महंगाई बढ़ने से पोल्ट्री व्यवसायी परेशान हैं. वहीं जिन किसानों ने पर्यायी तौर पर इस व्यवसाय की शुरूआत की है, उन्हें न तो इससे कोई लाभ हो रहा है और न ही खेती से. मुर्गी दाना के भाव बढ़ते जा रहे हैं. जो सोयाबीन का दाना 35 रुपए प्रति किलो मिलता था, वह अभी 70 रुपए प्रति किलो पर चला गया है. इसमें 5 फीसदी जीएसटी अलग से लगता है. 

    चारे का जुगाड़ करना हो गया है मुश्किल 

    वहीं 12 से 13 रुपए प्रति किलो चलने वाला मक्का दाना 19 से 20 रुपए प्रति किलो और मूंगफल्ली की ढेप 22 से 23 रुपये प्रति किलो से बढ़कर सीधे 38 रुपये प्रति किलो पर चली गई. कनकी 16 से 17 रुपए पर पहुंची है. इतना महंगा दाना होगा तो पोल्ट्री व्यवसाय कैसे चलेगा. एक पोल्ट्री फार्म वाले को 28 फीसदी सोयाबीन दाना, 40 फीसदी मक्का दाना और 20 फीसदी मूंगफली की ढेप लगती है. पशुचारे की तरह ही मुर्गी चारा भी महंगा होने से व्यवसाय करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

    कोरोना संकटकाल में सरकार को देनी चाहिए सब्सिडी

    मौजूदा दाने में भाव में लगातार वृद्धि होने के कारण किसानों को मक्का, गेहूं, ज्वार और बाजरा दाना में सब्सिडी दी जानी चाहिए. व्यवस्थापन व अन्य खर्च में वृद्धि होने के बावजूद किसान को अपना माल लागत मूल्य से भी कम दाम पर बेचना पड़ रहा है. सरकार जब इस व्यवसाय को पर्यायी रूप से बढ़ाने की बातें करती है तो इसे लेकर अनदेखी क्यों की जाती है. 

    उद्योजकों के व्यवसाय पर पड़ रहा है विपरीत असर 

    सरकार की इस बेरुखी के कारण व्यवसाय दम तोड़ देता है. एक मुर्गी प्रतिदिन 110 ग्राम दाना खा जाती है और 120 से लेकर 150 दिनों के बाद अंडा देना शुरू करती है. मुर्गी दाने में 48 फीसदी बाजार मिला होता है, बाकी अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं. मुर्गी जब से अंडा देना शुरू करती है तब तक भारी खर्च प्रति मुर्गी पर आता है. यही कारण है कि अंडे की कीमत बढ़ी है. बारिश नदारद रहने से भी पोल्ट्री व्यवसाय के हाल बेहाल है.