कोरोना: 2 वर्षों से भक्तों में मायूसी, आषाढ़ी एकादशी को लेकर है उत्सुकता

    • पंढरपुर यात्रा को लेकर भक्त चिंतित

    यवतमाल. वारकरी परंपरा में ‘हेची दान दे गा देवा, तुझा विसर न व्हावा’, ‘अहंकाराचा वारा न लागो..’ और ‘पंढरीची वारकरी वारी चुको न दे श्रीहरि’ यह 3 प्रमुख मांगे हैं, किंतु गत 2 साल से पूरे विश्व के साथ देश में भी कोरोना संक्रमण को लेकर लाकडाउन और ब्रेक द चेन के तहत प्रशासन ने समय-समय पर बीमारी को प्रतिबंध लगाने के लिए उपाय-योजनाएं और विविध नियमों के तहत ढील भी दी है, किंतु कोरोना को फैलने से रोकने लाकडाउन में विविध धार्मिक स्थलों को भी बंद रखा गया.

    दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर से बचने फिर से एक बार पंढरपुर की यात्रा प्रभावित हुई है. 2 वर्षों से विट्ठल भक्तों में मायूसी देखी जा रही है. निवृति, ज्ञानदेव, सोपान, मुक्ताबाई, एकनाथ, नामदेव, तुकाराम मुख्य सात पालकी समारोह हैं. बड़ी संख्या में समारोह 21 दिनों से लेकर 1 महीने तक चलते हैं.

    दिंडी में 7-8 गांवों के भक्त रहते है मौजूद

    खेत में बुआई पूरी करने के बाद किसान यात्रा को निकलते हैं. मुख्य पालकी समारोह हो अथवा क्षेत्र से पंढरपुर जाना हों, इनमें से प्रत्येक दिंडी 50 से 300 वारकरी तक भी रहती है. कम से कम 7 से 8 गांवों के भक्त मिलकर दिंडी रहती है. मार्ग कोई भी हों और चाहे कितने भी रूकें, इसमें की वाहन, भोजन, पानी, भजन, तंबू, बर्तन सभी दिंडी द्वारा नियोजित रहते हैं. इसकी योजना बनाई जाती है. इस योजना में बिसी अथवा चंदा और सामाजिक परोपकार की बड़ी सहायता इन दींडियों को रहती है. पंढरपुर यात्रा भक्तों के लिए चेतना का त्योहार है. कोरोना के चलते इस बार यात्रा खिडीत होने से भक्त चिंतित हैं.

    गुडी पाडवा हुआ की, यात्रा का नियोजन शुरू हो जाता है. ज्येष्ठ मास आया की यात्रा की आस लगती है तो आषाढ़ में इस आनंदयात्रा अनुभव की खुशी अवर्णनीय होती है. यात्रा का एकमात्र लक्ष्य सेवा भजन और सैर के माध्यम से खुशी लेना और खुशी देना है. इस खुशी को 2 साल से ग्रहण लगा है. अब आगे की यात्रा तो भी पांडुरंग ने खोलनी चाहिए यही आस है.

    लगातार दूसरे वर्ष पंढरपुर यात्रा प्रभावित

    आषाढ़ शुद्ध एकादशी और पालकी समारोह को लेकर महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा के आकर्षक पहलू हैं. एक तरफ वरुण राजा की जलधारा और दूसरी तरफ ताल-मृदांगों के सहारे हरिनामा में स्तब्ध भक्त, महाराष्ट्र में सैकड़ों साल पुरानी तस्वीर कोरोना के कहर ने पिछले साल से गायब है. लगातार दूसरे साल भी कोरोना की वजह से पंढरपुर यात्रा प्रभावित हुई है. माऊली, तुकाराम महाराज के मुख्य समारोह के साथ-साथ जिले के विविध गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दींडियां लेकर पंढरपुर जाते हैं, किंतु इस साल भी कोरोना का कहर रहने से इस वर्ष भी यात्रा खंडित होने के संकेत हैं. आषाढ़ी एकादशी चंद ही दिनो पर है ओर भक्त उत्सुक है.