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नेर. कोरोना संक्रमण और लॉकडाऊन की वजह से निर्माण हुए आर्थिक संकट में लोग फसे हुए है. जिन लोगों को बैंक के ईएमआई भरना संभव नही हुआ वे अब चक्रवाढ ब्याज लगने से परेशान है. बैंकों की चपेट से इन ग्राहकों का छुटकारा मुश्कील होने से अब आगामी त्यौहार मनाए की बैंक का ईएमआई चुकाए ऐसी समस्या निर्माण हुई है.

यवतमाल जिले की सभी बैंकों ने नोकरदार, व्यापारी, मजदुरों समेत कई घटकों को कर्ज बांटा है. कर्ज देते समय नोकरदारों का वेतन प्रमाणपत्र, अन्य व्यापारीयों से रोज होनेवाले व्यवहार तो मजदुरों से उनकी रोजाना आय ध्यान में ली गई. लेकिन अब कोरोना की वजह से लगाए गए लॉकडाउन में किसी के पास कोई रोजगार नही था, जिससे कोई आय नही होने से ईएमआई कैसे चुकाए ऐसी समस्या निर्माण हुई है. एक ओर महत्त्वपूर्ण दिपावली का त्यौहार मनाए की बैंक का ईएमआई चुकाए ऐसी समस्या कई परिवारों केक सामने निर्माण हुई है.

बैंक की किश्त चुकाने की चिंता

बेरोजगारी दिनोदिन बढ रही है. उद्योग-व्यवसाय भी अब बंद पडने की अवस्था में है. ऐसे में हम किसे न्याय मांगे ऐसी समस्या निर्माण हुई है. मुझे बैंक की किश्त चुकानी है, यह कैसे चुकाए इसकी चिंता है. – सविता चांभारे,कपडा व्यापारी दीप नगर यवतमाल.

सहुलीयत के प्रती बैंक गंभीर नही

बैंक से लगातार किश्त भरने के लिए फोन आ रहे है. यह फोन व्यापारीयों के लिए सिरदर्द बने है. कर्ज तो चुकाना है लेकिन इसमें सरकार द्वारा जो सहुलीयत घोषीत की गई इसके प्रती बैंक गंभीर नही है. – अरविंद राऊत, ऑटोमोबाईल व्यवसायिक यवतमाल.

ईएमआई पर निर्भर है बैंक के व्यवहार

कर्जदारों के ईएमआई पर बैंक के व्यवहार निर्भर है. हमे ग्राहकों की सेवा भी महत्वपुर्ण है. लेकिन कर्ज की वसुली नही हुई तो  आर्थिक समस्याए निर्माण होगी. इसलिए कर्ज वसुली का औपचारिक संदेश देना हमारा  कार्य है. -प्रदीप झाडे, महाप्रबंधक नेर अर्बन बँक.

खेतमाल की नही बिक्री

किसानों का खेतमाल कोरोना के पहले काफी आता था. लेकिन अब यह खेतमाल कम हो रहा है. जिससे सब्जीबाजार में भी मंदी है. किसानों का माल एवं बिक्री कम होने से संकट निर्माण हुआ है. – रूपेश दुधे, सब्जी निलामी प्रतिनिधि.

कर्ज देने में होती है आनाकानी

रोजगार निर्मिती करने के लिए कई योजनाए सरकार चलाती है. इस योजना के लिए बैंक कर्ज देती है. कर्ज देनेपर भी बैंक व्यवस्थापक इस ओर ध्यान नही देते. जिससे सरकार की योजना बदनाम होती है. मेरी फाईल गत एक वर्ष से बैंक में है. अबतक  व्यवस्थापक ने इसे मंजूर नही किया. आखिर हमे आंदोलन करना होगा. -एस. खोब्रागडे, गाडी व्यवसायिक यवतमाल.