किसान सोयाबीन को युरिया की दूसरी खुराक न दें : कृषि अधिकारी नवनाथ कोलपकर

    यवतमाल. सोयाबीन की फसल में यूरिया खाद डालने से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा विषम हो जाती है और फसल अधिक मात्रा में उग जाती है. इसलिए किसानों को यूरिया उर्वरक की दूसरी खुराक सोयाबीन में शुरुआती खुराक के बाद नहीं देनी चाहिए.

    जिले में कुल खरीफ रकबे के 33 फीसदी हिस्से पर सोयाबीन की बुआई हो चुकी है. सोयाबीन एक अनाज की फसल है जिसमें फसल की जड़ में होती हैं. ये नोड्यूल हवा में उपलब्ध 78% नाइट्रोजन को अवशोषित करते हैं. इसलिए सोयाबीन की फसल में यूरिया खाद डालने की जरूरत नहीं है. इससे विषम कार्बन पृथक्करण और फसल का बड़े पैमाने पर भौतिक विकास होता है.

    नतीजतन, फूल कम हो जाते हैं और उपज कम हो जाती है. प्रत्येक द्विबीजपत्री फसल की जड़ में होती हैं. ये नोड्यूल हवा से नाइट्रोजन को अवशोषित करते हैं. इसलिए इन फसलों को यूरिया के जरिए अतिरिक्त नाइट्रोजन देना गलत है. इस किस्म से फसल उत्पादन कम करने के विकल्प के रूप में किसानों को दोहरे नुकसान की आशंका है. इसलिए किसान सोयाबीन की फसल में यूरिया खाद न डालें, ऐसी अपील जिला कृषि अधिकारी नवनाथ कोलपकर ने की है.