दोबारा बुआई के लिए सहयोग करे सरकार

  • किसानों ने की मांग

यवतमाल. जिले में बुआई किए गए खेतों में से 30 प्रतिशत बीज अंकुरित नहीं हुए. इसलिए पहले ही आर्थिक संकट में फंसे किसानों पर अब दोबारा बुआई की नौबत आ गई है. बीज अंकुरित नहीं होने का प्रमुख कारण सदोष बीज ही बताया जा रहा है. मध्यप्रदेश की एक विशिष्ट कंपनी के अधिकांश बीज बेचे गए हैं. वहीं बीज अंकुरित नहीं हुए. इस कंपनी के गोल्ड आफर के कारण कई वितरकों ने यही माल किसानों को बेचा. इसमें किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है.

उधारी पर खरीदे गए बीज
किसान पहले ही कई वर्षों से फसल की कमी और कर्ज के बोझ का सामना कर रहे हैं. आज भी जिले में हजारों किसानों को सरकारी कर्जमाफी का लाभ नहीं मिला है. सरकारी कर्जमुक्ति मिले बगैर उन्हें नया फसल कर्ज भी नहीं मिल रहा. इस स्थिति में कई किसानों ने अपने घर के गहने बेंचकर तथा साहूकारों से डेढ़ गुना अधिक ब्याज से पैसा लेकर बुआई के लिए लगने वाले. बीजों की खरीद की. बारिश शुरू होते ही बुआई कार्य भी शुरू कर दिया. पर प्रत्यक्ष में सोयाबीन के बीज उगे ही नहीं है.

उमरखेड़ से वणी तक सभी तहसील से किसानों की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं. बीज अंकुरित नहीं होने से इन किसानों को फिर से बीज खरीद करने के लिए किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत आ गई है. पहले ही बीज उधारी पर खरीदे गए, अब बीजों के लिए फिर कहां से पैसों का जुगाड़ करें इस चिंता में किसान हैं.