ZP School
Representational Pic

    वणी. पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण ने आम आदमी का आर्थिक बजट बर्बाद कर दिया है. नतीजतन, अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने वाले आम लोगों के बच्चों को अब वणी तहसील के जिला परिषद स्कूलों में प्रवेश दिया जा रहा है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी कान्वेंट के भविष्य के लिए खतरा पैदा हो गया है.

    पिछले दो साल से हर जगह कोरोना का प्रकोप है. नियंत्रण पाने के लिए लाकडाउन लगाया जाता था. महीनों तक चले इस लाकडाउन के कारण कई लोगों की नौकरी चली गई. कई के रोजगार बंद हो गए. नतीजतन, आर्थिक स्थिति खराब हो गई. कोरोना से पहले माता-पिता बच्चों को अंग्रेजी कॉन्वेंट में पढ़ाते थे. 

    नतीजतन, ग्रामीण इलाकों में अंग्रेजी स्कूलों की एक बड़ी मांग थी. लेकिन जानलेवा कोरोना ने अब पूरी तस्वीर ही बदल दी है. कोरोना से घर में पैसा नहीं है. इससे कई लोगों का जीना मुश्किल हो गया. सवाल यह है कि अंग्रेजी स्कूल की फीस का भुगतान कैसे किया जाए. कई अभिभावक इस साल के सत्र में अपने बच्चों के प्रमाणपत्र निजी अंग्रेजी स्कूलों से वापस ले रहे हैं.

    मूल रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी स्कूलों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है. शिक्षकों, शैक्षिक सुविधाओं, रियायतों को अच्छे तरीके से प्रदान किया जाता है. इन स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने से उनके व्यक्तित्व का विकास करने के लिए विभिन्न गतिविधियां की जा रही हैं, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना के कारण स्कूल बंद हैं. ऑनलाइन लर्निंग का प्रयोग उतना सफल नहीं रहा, जितना होना चाहिए था. इसका असर पहली से पांचवीं तक के छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ा.

    ग्रामीण क्षेत्रों में भी नेटवर्क की समस्या बढ़ी है. कई ऑनलाइन शिक्षा का लाभ भी नहीं उठा पा रहे हैं. इसलिए अभिभावकों का रुझान अब जिला परिषद स्कूलों की ओर देखा जा रहा है. दो साल में आम आदमी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. उन्होंने बजट का समायोजन कर निजी स्कूलों की फीस का भुगतान भी किया, लेकिन अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है और रोजगार छिन जाता है तो अभिभावकों को स्कूल फीस दे, ऐसा प्रश्न अभिभावकों के सामने खड़ा हुआ है.

    आर्थिक संकट से जूझ रहे अंग्रेजी स्कूलें

    दो साल से स्कूल बंद होने के कारण कई अभिभावकों ने स्कूल फीस का भुगतान नहीं किया है. इन स्कूलों ने कर्ज लिया और स्कूल बसें लीं. स्कूल प्रशासन इस सवाल का भी सामना कर रहा है कि बैंक ऋण कैसे चुकाया जाए क्योंकि उसे माता-पिता से फीस नहीं मिल रही है.