दाल रोटी भी हुई महंगी, कैसे गाए प्रभू के गुण

वणी. पहले कहा जाता था कि दाल रोटी खाए , प्रभू के गुण गाए जाए़ कही फिल्मों मे भी इस तरह के स्लोगन, गीत सुनाई देते थे लेकिन वर्तमान मे आसमान छुती महंगाई मे आम आदमी से दाल रोटी की जुगत करना भी मुश्किल हो रहा है ऐसे मे वे प्रभु के गुण कैसे गाए यह प्रश्न उसके सामने उपस्थीत हो रहा है़ वर्तमान मे हर क्षेत्र मे महंगाई बढ गई है़  अपने मन पंसदीदा खाने पिने  के साथ ही मकान बनाना, जमीन की खरीददारी भी आम इंसानों के बस की बात नही रही है़  

आसमान छुती महंगाई की वजह से मजदूर वर्ग, किसान यहां तक की नौकरी पेशा वाले परीवारों को भी खाने पिने का जुगत करने मे काफी परेशानी होती दिखाई दे रही है़ पहले कम से कम आम आदमी दाल रोटी का जुगत कर कैसे तो भी अपना एवं परीवार का गुजारा कर लेता था और वह इसमे भी सुकुन रखता था़ लेकिन वर्तमान मे तुअर, चना एवं गेहु के आसमान छुते दामो ने उन्हे दाल रोटी खाने मे दिक्कते पैदा कर रही है़  वर्तमान मे तुअर के दाल के दाम 11 हजार रुपए प्रती क्विंटल से भी आगे चला गए है़ साथ ही साथ चना दाल, मुंग दाल, मुंग मोगर, मसूर दाल, बरबटी दाल, उडद दाल के दामों मे हर रोज बढोत्तरी होती जा रही है.

दालों के दामों मे बढोत्तरी होने के बाद भी इसका किसानों को सिधा लाभ नही हो रहा है़ क्योंकी जब किसान मेहनत कर इन दालों की फसल लेता है और जब उत्पादन उसके पास आत है तब बाजार मे इसकी किंमत नही होती है बडे बडे व्यापारी अत्ंत कम दामों से इसे खरीदकर इसका भंडार भर कर रखते है एवं बाजार मे जब इन चिजों की कमी आ जाती है तो इन्हे काफी महंगे दाम बढाते है़  हालाकी पिछले वर्ष सरकार ने जमाखोरी पर सिंकजा कसते हुए कार्रवाई की थी़  महंगाई का सबसे ज्यादा असर गृहणीयों पर पडता दिखाई दे रहा है़ क्योंकी किचन की हर चिंज महंगी हो गई है़ सब्जी, फ्रुट के दाम हर रोज बढते जा रहे है़ आने वाले दिनों मे  नवरात्री एवं दीपावली जैसे बडे त्यौहार आ रहे है़ ऐसे मे माना जा रहा है कि महंगाई और अधीक बढ सकती है़ ऐसे मे आम आदमी अब त्यौहारों के समय भी दाल रोटी भी खाए तो भी, अपना नसीब मानकर चल रहा है़