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आर्णी. कोरोना महामारी के चलते स्कूल, महाविद्यालय बंद है. इससे छात्रों को शिक्षा की धारा में रहना मुश्किल हो रहा है. इस अवधि के दौरान ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में छात्रों को शिक्षा के लिए किए गए उपायोग में एक बडा अंतर है. वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में छात्र सभी संसाधनों के बल पर ऑनलाइन अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को इस सुविधा के अभाव में एक कदम पिछड गए है. गांव के छात्रों के लिए शिक्षा की धारा में रहना मुश्किल हो गया है. कोरोना की महामारी दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में है.

ऐसे कठिन समय में सामाजिक प्रतिबद्धता के रुप में, आर्णी तहसील के  बीड (खेड) निवासी दिनेश सहदेव पवार पिछले दो महीनों से आज तक अपने गांव के छात्रों को लगातार आफलाइन शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. बच्चों को पढाते समय, यह आधुनिक शिक्षण सामग्री का भी उपयोग कर रहा है, इसमें मुख्य रूप से युटूब का उपयोग कर रहा है.  शिक्षा के इन पाठों को प्रदान करते समय सोशल डिस्टन्सिंग का पालन कर कोरोना महामारी के लिए भारत सरकार के दिशानिर्देश का पालन किया जा रहा है. विद्यार्थियों में सुरक्षित दूरी, मास्क व सैनिटाइजर का उपयोग किया जा रहा है.  छात्रों का रुका हुआ शिक्षण शुरू होने के कारण इस गांव में नए सिरे से चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है. इस उपक्रम के लिए गांव के प्रतिष्ठित नागरिक व प्राथमिक शिक्षक आदि का सहयोग मिल रहा है.