पुसद में उमेद के निजीकरण को रोकने के लिए महिलाओं का एक दिवसीय धरना आंदोलन

पुसद. केंद्र प्रायोजित महाराष्ट्र राजय ग्रामीण आजीविका अभियान उमेद आज राज्य के ग्रामीणा क्षेत्रों की महिलाओं एक छत के नीचे लाया जा रहा है, महिलाओं का अधिकतम विकास किया जा रहा है. गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य से लगभग 45 लाख परिवार इस अभियान में शामिल हुए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में उमेद यही मुख्य आधार है. इस उद्देश्य नष्ट करने ‘प्रोफिट मेंकिंग’ कंपनियों को उतारकर निजी स्वार्थ देख रहें है. स्व-सहायता समूहों, ग्राम संघों और प्रभासांगो को एक सूत्र में काम करने के लिए रखने के लिए 2011 से महाराष्ट्र में उमेद अभियान शुरू किया गया है. 

केंद्रीय रूप से सम्मानित एम.एस.आर.एल.एम. अभियान महाराष्ट्र सरकार निजीकरण के लिए अग्रणी महिलओं के समग्र विकास पर प्रतिबंध लाने के लिए ठोस प्रयास कर रही है. केंद्र सरकार की देखरेख में चल रहा यह अभियान सिर्फ महाराष्ट्र में निजी संस्था की ओर देने की दाव सरकार स्तर पर किया जा रहा है. जिसके तहत ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति न करते हुए कार्यरत कर्मचारी होकर 10 सितंबर 2020 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी उमेद के एक पत्र के अनुसार, वर्तमान कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त हो गया है. यह उल्लेख किया गया है कि, उनकी पुननिर्यक्ति किसी भी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों न करने के लिए कहा गया है. अब से, सभी नियुक्तियां बाहरी संगठन के माध्यम से दी जाएगी और  उमेद अभियान की सभी जिम्मेदारियों को बाहरी संगठन में स्थानांतरित कर दिया गया है.

उमेद अभियान में काम करनेवाले कर्मचारियों को फिर से नियुक्ति नहीं होने के कारण समूहों, ग्राम संघों, प्रभागसंघों का कामकाज बाधा उत्पन्न हुई है, उमेद का कार्य किसी निजी संस्था न दिया जाए. इसके लिए उमेद की महिलाओं ने पुसद, दिग्रस, महागाव, उमरखेड तहसील की सैकडों महिलाओं ने एक दिवसीय धरना आंदोलन कर इसका विरोध प्रदर्शन कर पुसद उपविभागीय अधिकारी द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए ज्ञापन सौंपा. 

अभियान को निजीकरण से बचाने के लिए, उचित न्याय पाने के लिए दिन-रात काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कई याचिकाएँ की गई हैं, लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा है. जिससे महिलाओं को धरना आंदोलन करना पड रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में वंचित, विकलांग, निराश्रित और जरूरतमंदों जैसे विभिन्न जातियों और जनप्रतिनिधियों के वंचित वर्गों को एकजुट करके ग्रामीण स्तर पर गरीबी उन्मूलन का कार्य किया जा रहा है. अभियान के माध्यम से समुदाय में महिलाओं की स्थायी आजीविका प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है. और महिलाएं स्थायी आजीविका के लिए अपने रास्ते पर हैं. लेकिन सरकार के इस कदम ने महिलाओं को अनिश्चित बना दिया है कि क्या वे इस अभियान से आगे बढ़ेंगी. राज्य सरकार कल्याणकारी राज्यों में कल्याण अभियान को समाप्त करने की योजना बना रही है.

हम सरकार को अपने विचार बता रहे हैं. कोविड की आलोचनात्मक स्थिति में, हमें अनुबंध कर्मियों की निर्बाध सेवा और बाहरी एजेंसियों के माध्यम से अभियान के संचालन के खिलाफ विरोध करना पड रहा है. अगर सरकार महिलाओं के खिलाफ आर्थिक और सामाजिक अन्याय की सराहना नहीं करती है, तो उमेद-एम तीव्र आंदोलन की चेतावनी  एस आर एल एम बचाव समिति द्वारा दी जाता है. इस आंदोलन को सार्वजनिक रूप से जिजाऊ महिला ब्रिगेड पुसद और स्वामिनी शराबबंदी आंदोलन द्वारा समर्थन मिला.