ओवरलोड वाहनों से गड्ढों में तब्दील हो गई सडक

यवतमाल. सडक हादसे को रोकने के लिए सरकार ने नियमों को भले ही सख्त किया हो, लेकिन उपखंडा क्षेत्र में यह प्रभावी ही नहीं है. यहां नागपुर-हैदराबाद हाइवे के सिंगल सडकों पर रोजना क्षमता से दोगुना ओवरलोड वाहन प्रशासन के आंखों के सामने से आते-जाते है. लेकिन इन पर  कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. इन वाहनों की ओवरलोड वाहनों की यातायात से सडक कई जगहों खस्ताहाल हो गई है. ऐसे में अन्य वाहन चालकों के लिए हादसे की आशंका बनी रहती है. उपराजधानी नागपुर, अकोला, चंद्रपुर, मुख्यालय से प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रक क्षमता से अधिक वजन लदे निकलते है. इसके चलते पांढरकवडा बाई पास से लेकर लोहारा तक 20 किलोमीटर की सडक पिछले 1 वर्ष से अधिक समय से गुड्ढों में तब्दिल हो गया है. ओवरलोड ट्रकों की वजह से सडक पर चलना मुश्किल हो गया है. ओवरलोडिंग के चलते सडक टूट चुकी है, खस्ताहाल हो गई है.

ओवरलोड ट्रक आफर पर कोई कार्रवाई की नहीं जाती

रोड पर टोल बचाने के चक्कर में अमरावती मार्ग पर स्थित धामणगांव बाइपास, पांढरकवडा बाइपास से लेकर लोहारा इस मार्ग से हरदिन कई ट्रक जाते है, लेकिन इन पर यातायात विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

अरविंद राऊत, यवतमाल

मुख्य चौराहे से रोजाना शेकडो ट्रक गुजरते है कही बार हादसे भी हो चुके है, लेकिन न परिवहन विभाग या पुलिस उनपर कार्रवाई नहीं करता.

सचिन मनवर सामाजिक कार्यकर्ता

ओवरलोडींगकर कारवाई कब

फोर लोडींग के खिलाफ कारवाई जरुरी है, लेकिन परिवहन विभाग के कर्मचारी यवतमाल, पांढरकवडा, पिंपलखुटी समीवर्ती क्षेत्र में ट्रक की तलाशी नहीं करते हुए छोड देने के पिछे का कारण खोजा नहीं जाता.

 सुरज खोबरागडेजिल्हाध्यक्ष संभाजी ब्रिगेड यवतमाल