दिवाली के बाद खुलेगे स्कूल, अभिभावको की लेनी होगी लिखित सहमति

  • पूरी एहतियात बरती जाएगी, जब्बार चीनी

वणी. स्कूलो की घंटी दिवाली के बाद बज जाएगी कोरोना के चलते मार्च मे बंद हुए स्कूलों में दिवाली के बाद छात्र पढाई करने पहुंचेंगे. कोविड प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने स्कूलों की व्यवस्था संबंधी तैयारियां शुरू की है. शुरूआत मे ज्यादातर स्कूलों ने सिर्फ 9 से 12 वीं के छात्रों को ही बुलाया है. स्कूल मे सिर्फ वही छात्र आएंगे , जिनके अभिभावकों की ओर से लिखित सहमति मिल गई होगी.

बता दे कि प्रशासन ने पिछले दिनों स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक मे 23 नवंबर से विद्यालय खोलने के निर्देश दे दिए है हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों का कडाई से अनुपालन स्कूलों को करना होगा. दिवाली के बाद से ही  वणी तहसील के ज्यादातर स्कूलों में छात्रों के आने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. स्कूल अधिकतम तीन से चार घंटे के लिए संचालित होंगे. साथ ही स्कूल मे छात्रों को लंच लाने की अनुमति नही होगी . छात्र घर से ब्रेकफास्ट करके आएंगे . स्कूल खुलने से पहले तहसील के सभी स्कूल तैयारियो मे जुटे है.

यह होंगी तैयारिया

स्कूलो का सैनिटाइजेशन कराना. क्लास मे बैठने की व्यवस्था दूर-दूर करना, बच्चो की गेट पर ही थर्मल स्कैनिंग की जाएगी. जिन छात्रो को स्कूल आना है उनके अभिभावकों से अनुमति पत्र भी लेना होगा, इसके अलावा शिक्षकों को भी सख्त निर्देश दिए जा सकते है कि वे क्लास मे सोशल डिस्टेसिंग के साथ ही मास्क प्रयोग पर जोर देंगे, इसके अलावा बच्चों को क्या करना है? क्या नही करना है? इसकी नियमित जानकारी देंगे.

इनका किया जा सकता है पालन

छात्रो को स्कूल आने पर सख्त नियमों का पालन करना पड सकता है. वे मास्क हर हाल मे लगाकर आएंगे घर से पानी बोतल लेकर आएंगे, इसके अलावा सैनिटाइजर साथ में रखना जरूरी होगा. छात्र आपस मे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे , यादि कोई छात्र बीमार है तो उसके स्कूल आने पर रोक रहेगी. तहसील मे माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 227 के करीब है इसमे जिला परिषद की 140 एवं 23 इंग्लिश मीडीयम स्कुल है वहीं परसोडा की शासकिय आश्रम शाला छोडकर किसी भी विद्यालय को कोविड सेंटर नही बनाया गया. दूसरे चरण मे जि.प. प्राथमिक स्कूलो मे होगा प्रयोग शिक्षा विभाग व्दारा मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक स्कूल शुरू होने के बाद दूसरे चरण मे तहसील के जि.प. प्राथमिक विद्यालयों में भी शाला शुरू करने के लिए प्रयोग हो सकता है.