वणी तहसील में लुप्त हो रहे पारंपरिक व्यवसाय

वणी. वणी तहसील में पारंपारिक व्यवसाय बंद होने की कगार पर है. आधुनिकता के इस दौर मे पारंपारिक व्यवसाय करनेवाले बलूतेदारो को काम नही मिल रहा है और वह भुखमरी का संकट झेल रहे है. रोजगार के अभाव मे उन्हें भारी आर्थिक संकटो का सामना करना पड रहा है. जानकारी के अनुसार समय बहुत तेजी से बदल रहा है. कहा जाता है कि जो समय के साथ चलकर बदलता है, वहीं इनसान इस दुनिया मे सफल हो सकता है और लंबे समय तक टिक सकता है. तथापि इस ग्रामीण अंचल मे बलूतेदारा स्पर्धा के दौर मे पिछड से गए है, उनके पारंपारिक व्यवसाय बंद होने की कगार पर है.

तहसील के गांवो मे मिट्टी के मटके ,कलसे, माठ आदि बनानेवाले कुम्हारों के पहिये और लोहारो का भाता अब कही नजर नही आता हैं. लोहे की वस्तुए बनानेवाले लोहार भी बहुत कम हो गए है. झाडू बनानेवाले, लकडी के दरवाजे खिडकिया बनानेवाले ग्रामीण कारीगरों का व्यवसाय भी नष्ट होने के मार्ग पर है. एक समय ऐसा था कि ग्रामीण भाग मे लोग अपनी आवश्यकताओ के लिए लोग इन्ही बारह बलूतेदारो पर निर्भर रहते थे. परंतु बदलते  युग मे सब कुछ तेज गति से बदल रहा है. रहन-सहन का स्तर बदल गया है और लोगो की आवश्यकताए भी बदल गई है. कम्यूटर और डिजिटल क्रांति के इस स्पर्धात्मक युग मे सभी व्यवसायो पर आधुनिकता की छाप पड गई है. पारंपारिक परिधान बदल गए है और हर जगह आधुनिकता का प्रभाव दिखाई दे रहा है.

ऐसे मे गावो के बारह बलूतेदार इस स्पर्धा मे टिक नही पा रहे है और पारंपारिक वस्तुए लुप्तप्राय हो रही है. गौरतलब है कि पूर्व काल मे किसान कृषि कार्यों के लिए हल, बखर आदि पारंपारिक उपकरणो का इस्तेमाल करते थे परंतु आज बैलजोडी की जगह ट्रैक्टर ने ले ली है. पहले फसलों की कटाई हाथ से की जाती थी. परंतु वर्तमान मे फसलों की बुआई से लेकर कटाई तक के सभी कार्य मशीनों से होने लगे है और मडाई भी मशीन से ही की जाने लगी है. खेती-बाडी से जुडे व्यवसायों पर आधुनिकता की छाप पड गई है और पारंपारिक व्यवसाय नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुके है. जागरूक लोगो का कहना है कि ग्रामीण अंचल मे पारंपरिक व्यवसायो के संवर्धन के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने की जरूरत है.