कोरोनाबाधित मृत्यु की संख्या कम करने के लिए गंभीरता से काम करें – जिलाधिकारी एम. डी. सिंह

  • संपर्क, परीक्षण के नमूने, सारी व आइएलआइ के लक्षणों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

यवतमाल. जिले में कोरोनाबाधितों की मृत्यु की संख्या दिन पर दिन बढती जा रही है. यह हमारे जिले के लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. कोरोनाबाधित मरीजों की मृत्यु को रोकना सरकार और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसलिए पाजिटिव लोगों के संपर्क में आनेवाले नागरिकों खोज, अधिक से अधिक सैंपालों का परीक्षण, सारी या आइएलआइ जैसे लक्षणों का समय पर निदान के साथ संपर्क में नागरिकों का पता लगाने पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है. जिलाधिकारी एम. डी. सिंह ने इस संबंध में सभी को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए. कोरोना वायरस के बढते प्रकोप की पार्श्वभूमि पर स्थानीय नियोजन भवन में आयोजित बैठक में वे बोल रहें थे.

इस समय जि.प.मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. श्रीकृष्णनाथ पांचाल, पुलिस अधिक्षक एम. राजकुमार, सहाय्यक जिलाधिकारी भाग्यश्री विस्पुते, अतिरिक्त जिलाधिकारी सुनील महिंद्रीकर, निवासी उपजिल्हाधिकारी ललितकुमार व-हाडे, कोरोना नियंत्रण समन्वयक डा. मिलिंद कांबले आदि उपस्थित थे. मार्च माह में कोरोना का प्रकोप शुरू होने के बाद से ढाई महीने में, जिले में कोई मौत नहीं हुई. ऐसा बताकर जिलाधिकारी ने कहा कि, वर्तमान में इसकी संख्या बढ रही है. इसलिए, जैसे ही एक पाजिटिव मरीज पाया जाता है, क्षेत्र को तुरंत प्रतिबंधित कर संबंधित मरीजों के संपर्क के हाइरिस्क व लो-रिस्क कम समय में संपर्क में आनेवाले सौ फीसदी नागरिकों के सैंपल परीक्षण के लिए भेजने, इन बातों को प्राथमिकता दें. अगर इनमें से एक प्रतिशत लोगों को भी रिहा किया जाता है, तो मानव श्रृंखला फिर से बढने की संभावना है. इसके अलावा आईएलआइ (बुखार, जुकाम, खांसी) या सारी (बुखार, जुकाम, खांसी व सांस लेने की तकलीफ) के लक्षण तीन से चार दिनों से अधिक समय तक रहते हैं, तो ऐसे व्यक्तियों के नमूने तुरंत प्रयोगशाला में भेजे. ग्रामस्तर के साथ-साथ तहसील स्तर की समितियों को इसमें लापरवाही नहीं करनी चाहिए अन्यथा संबंधित समिति पर जिम्मेदारी तय की जाएगी. यह देखा गया है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सावधानीपूर्वक नहीं किए जा रहे हैं. इसलिए आइएलआइ या सारी के लक्षणों वाले नागरिक सर्वेक्षण से बच रहें है.

ऐसे लक्षणों वाले लोग बहुत गंभीर स्थिति में मेडिकल कालेज में भर्ती हो रहे है, जिससे उनहें इलाज के लिए कम समय मिलता है. वैकल्पिक रुप से, उनकी राह मृत्यु की ओर बढती है. इसलिए इस सबंध में कोई लापरवाही सही नहीं जाएगी. नागरिकों को भी अपने जीवन के लिए इस मामले में ध्यान देना चाहिए. कोविड केअर सेंटर में नागरिकों के बुखार और एसपीओटू की नियमित जांच करें. पूर्वव्याधियों से ग्रसीत नागरिकों की सूची शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में अद्यावत होनी चाहिए, ऐसे लोगों को नियमित रुप से दूरध्वनी से संपर्क करने के लिए नगर परिषद व तहसील स्तर पर कॉल सेंटर स्थापित करने के निर्देश जिलाधिकारी ने दिए. सभी नोडल अधिकारियों ने आइएलआइ व सारी के लक्षण, को-मोरबीड (पूर्व व्याधीं से ग्रस्त) व्यक्ती, पाजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आनेवाले की यंत्रणा से रोज समीक्षा करनी चाहिए. परीक्षण के लिए सैंपल देने के लिए नागरिकों को कोविड केअर सेंटर का डर नहीं होना चाहिए, यदि कोई निगेटिव रहने पर उन्हें तुरंत घर छोडा जाएगा. पाजिटिव निकलने पर अपनी जान के लिए समय पर इलाज कराने में मददगार साबित होगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि योजना बनाई जानी चाहिए कि क्या रोटेशन प्रणाली में वार्ड/क्षेत्रवार जाकर सैंपल एकत्र करना संभव होगा क्या? इसका नियोजन करें, ऐसी सूचनाएं भी उन्होंने दी.

बैठक में जिला शल्य चिकित्सक डा.तरंगतुषार वारे, प्रभारी जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. पी.एस.चव्हाण, संबंधित उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, तहसील स्वास्थ्य अधिकारी, संबंधित नोडल अधिकारी आदी उपस्थित थे. 25 हजार एंटीजन किट के लिए 2 करोड मंजूर, जिले में अधिकतम नागरिकों के नमूनों की जांच के लिए 25 हजार एंटीजन किट खरीदे जाएंगे. पालकमंत्री संजय राठोड के सुझाव पर जिलाधिकारी ने इसके लिए 2 करोड रुपए मंजूर किए हैं. उक्त किट प्राप्त होते ही सप्ताह भरे में समूचे तहसीलों में किट वितरित की जाएगी तथा एंटिजन किट द्वारा प्रतिदिन कम से कम 300 परीक्षण करने का सुझाव दिया.