पुणे

Published: May 08, 2021 03:58 PM IST

Case Registeredअंततः मायमर मेडिकल कॉलेज के खिलाफ केस दर्ज, जानें क्या है मामला?

कंटेन्ट राइटरनवभारत.कॉम

पिंपरी. बिल चुकाने (Bill Payment) में असमर्थ एक बेटे को उसके कोरोना संक्रमित मृत (Death) पिता का शव देने से मना करने और शव (Dead Body) को तीन दिन तक कोल्ड स्टोरेज (Cold Storage) में रोके रखने के मामले में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar) द्वारा प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। इसके तुरंत बाद शनिवार को तलेगांव दाभाड़े पुलिस ने तलेगांव दाभाड़े स्थित मायमर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस बारे में सुधीर गणेश लोके (23) ने शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले को उजागर करनेवाले सांसद श्रीरंग बारणे ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ धारा 297 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

तलेगांव दाभाडे के मायमर मेडिकल कॉलेज में 200 बेड का कोविड हॉस्पिटल शुरू किया गया है। यहां गणेश शंकर लोके (50) नामक मरीज की कोरोना से मृत्यू हो गई। उनके इलाज का बिल नहीं चुकाए जाने के कारण कॉलेज प्रशासन ने उनका शव देने से मना कर दिया और तीन दिन तक कोल्ड स्टोरेज में रखा। लोके के पुत्र सुधीर ने सांसद श्रीरंग बारणे से मुलाकात की और इसकी शिकायत की। इस पर आक्रोशित सांसद बारणे ने कॉलेज की प्रमुख डॉ. सुचित्रा नांगरे को फटकार लगाई और कोरोनाग्रस्त मृतक का मृतदेह पैसों के तीन दिन तक रोके रखने को लेकर जवाब मांगा। लोके के घर के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव है, उनका बेटा सुधीर भी क्वारंटाइन है और फिर भी वह पैसों के इंतजाम के लिए यहां-वहां भागदौड़ कर रहा है। फटकार के बाद कॉलेज प्रशासन ने लोके का मृतदेह उनके परिजनों को सौंपने की तैयारी दर्शाई। 

सांसद श्रीरंग बारणे ने अजीत पवार से की शिकायत 

शुक्रवार को पुणे जिले में कोरोना का जायजा लेने पहुंचे उपमुख्यमंत्री एवं जिले के पालकमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें सांसद श्रीरंग बारणे ने पवार को इस गंभीर घटना से अवगत कराया और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। इस पर पवार ने प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने और मामला दर्ज करने के आदेश दिए। सांसद बारणे ने यह शिकायत भी की कि समीक्षा बैठक रहने से राजस्व विभाग के अधिकारियों ने एक दिन पहले ही सुधीर लोके, जो क्वारंटाइन है, के पास जाकर खुद उसका बयान लिखकर उसके हस्ताक्षर लिए। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।