Congressman take strong note on sharad Pawar remarks

शरद पवार ने अपने इंटरव्यू में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि राहुल गांधी में निरंतरता नहीं है.

यद्यपि महाराष्ट्र की शिवसेना के नेतृत्ववाली महाविकास आघाड़ी सरकार में एनसीपी और कांग्रेस शामिल हैं फिर भी एनसीपी प्रमुख और महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार समय-समय पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर बेबाक टिप्पणी करने में कोई कसर बाकी नहीं रखते. ऐसा करके पवार या तो राहुल को राजनीति में अपनी सीनियारिटी जताना चाहते हैं अथवा उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देना चाहते हैं कि अभी वे कच्चे हैं और राजनीति के बहुत से दांवपेंचों से अनभिज्ञ हैं. यदि बीजेपी को टक्कर देना है तो राहुल को बहुत कुछ सीखना पड़ेगा. चाहे जो भी हो, पवार की ऐसी कोई भी टिप्पणी कांग्रेस नेताओं को बुरी तरह अखर जाती है. उन्हें लगता है कि पवार को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल के शीर्ष नेता के बारे में कोई अवांछित टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. उनकी ऐसी कोई भी कमेंट कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं है.

शरद पवार ने अपने इंटरव्यू में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि राहुल गांधी में निरंतरता नहीं है. यह उनका आकलन हो सकता है क्योंकि ऐसे भी मौके आए जब राहुल संसद सत्र के चलते छुट्टी बिताने विदेश चले गए अथवा उन्होंने पूर्णकालिक राजनीति में दिलचस्पी नहीं दिखाई. उन्होंने सतत रूप से सरकार के खिलाफ अभियान नहीं चलाया. मोदी सरकार को हर मुद्दे पर लगातार घेरने में वे कहीं न कहीं चूक गए. शरद पवार भूल गए कि हर व्यक्ति के जीवन का ग्राफ अलग रहता है. पवार खुद जमीन से जुड़े नेता रहे हैं जिन्होंने महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 40 वर्ष से भी कम आयु में वे वसंतदादा पाटिल की सरकार को गिराकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए थे. केंद्र की नरसिंहराव सरकार में रक्षामंत्री तथा मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार में उन्होंने कृषिमंत्री का पद संभाला. जब 1993 में जब मुंबई सीरियल बम धमाकों से दहल उठी थी तब सुधाकरराव नाईक की जगह उन्होंने महाराष्ट्र का नेतृत्व संभाला था और राज्य को स्थिरता व आत्मविश्वास दिया था. 80 वर्षीय पवार ने राजनीति ही नहीं क्रीड़ा क्षेत्र में भी नेतृत्व प्रदान किया. वे वीसीसीआई और आईसीसी के अध्यक्ष रहे. क्रिकेट के अलावा कबड्डी, कुश्ती, खो-खो को भी उन्होंने बढ़ावा दिया. पवार का बारामती पैटर्न चर्चित रहा.

पहले चुनौती और फिर तालमेल

शरद पवार ने विदेशी मूल के मुद्दे पर सोनिया गांधी को चुनौती देने का दुस्साहस किया था. वे ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि महाराष्ट्र में उनकी जड़े मजबूत थीं. कांग्रेस से अलग होने पर उन्होंने पी ए संगमा और तारिक अनवर को साथ लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस बनाई और दिखा दिया कि अपने राज्य की राजनीति में उनका कितना वजन है. बाद में यूपीए में उनका कांग्रेस से तालमेल हो गया. आज भी पवार महाराष्ट्र की उद्धव सरकार को मार्गदर्शन कर रहे हैं और उनकी राजनीतिक चालों का कोई तोड़ बीजेपी के पास नहीं है. पवार ने कहा भी कि 25 वर्ष तक कोई आघाड़ी सरकार को नहीं हटा सकता. महाराष्ट्र की सत्ता में सहभागी होने के लिए कांग्रेस सरकार में जूनियर पार्टनर बनने को राजी हो गई.

प्रतिक्रिया तो होनी ही थी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर पवार की टिप्पणी से कांग्रेस भड़क उठी. महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष यशोमति ठाकुर ने राज्य सरकार में अपने सहयोगी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे राज्य में स्थिर सरकार चाहते हैं तो कांग्रेस नेतृत्व पर टिप्पणी करने से बचें. यशोमति ने अंग्रेजी और मराठी में ट्वीट करते हुए महाविकास आघाडी नेताओं के लेखो व इंटरव्यू का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व बहुत मजबूत और स्थिर है. महाविकास आघाड़ी का गठन लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारी मजबूत आस्था का परिणाम है. हर किसी को गठबंधन के बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए. इसके अलावा एनसीपी और शिवसेना नेताओं ने पवार की टिप्पणी को दरकिनार कर दिया है और कहा कि उनके बयान का राज्य सरकार की स्थिरता से कोई लेना-देना नहीं है.